रांची की सड़कों पर कांग्रेस का हल्लाबोल: जनगणना में OBC हिस्सेदारी को लेकर केंद्र को घेरा

रांची की सड़कों पर कांग्रेस का हल्लाबोल: जनगणना में OBC हिस्सेदारी को लेकर केंद्र को घेरा

नई दिल्ली: झारखंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने जनगणना फॉर्म में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए एक अलग कॉलम बनाने की मांग को लेकर रांची में लोक भवन तक पेडल मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अगुवाई में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन रांची के मोहराबादी मैदान में स्थित बापू वाटिका से रवाना हुआ।

लोक भवन के पास समाप्त हुए दो किलोमीटर लंबे मार्च में प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी व अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ शामिल होकर कमलेश ने जनगणना प्रश्नावली में ओबीसी कॉलम को शामिल न किए जाने पर केंद्र सरकार पर ओबीसी के अधिकारों और हिस्सेदारी के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।

ओबीसी कॉलम की मांग और ज्ञापन

जबकि झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने देश में 65 फीसदी ओबीसी आबादी होने का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब एसटी-एससी के लिए कॉलम है तो ओबीसी के लिए क्यों नहीं, और मार्च के पूरा होने पर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को ज्ञापन सौंपकर केंद्र से जनगणना फॉर्म में ओबीसी का अलग कॉलम शामिल करने का आग्रह किया है।

केंद्र सरकार ने देश में होने वाली अगली जनगणना के लिए 40 सवालों की एक नई सूचि जारी कर दी है, जिसमे पहली बार नागरिको से उनकी जाति और कोरोना वैक्सीन (कोविड-19) लगवाने की जगह के बारे में पूछा जाएगा।

झारखंड में सर्वे और टाइमलाइन

यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी जिसकी शुरुआत 1 सितंबर से बर्फ़बारी वाले इलाको से है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह काम अगले साल शुरू होगा। देश के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब आम जनगणना के दौरान लोगों का जातिगत आंकड़ा भी जुटाया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक घरों की लिस्टिंग और बुनियादी डेटा इकठा करने का पहला चरण झारखंड में मई और जून के दौरान पूरा हो चूका है वही जाति से जुड़े मुख्य सवाल अगले साल 9 फरवरी से 28 फरवरी होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं