यूपी के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के बीच उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा विवादों के केंद्र में आ गए हैं।
चुनाव आयोग द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की गई है और आरोप लगाया गया है कि वे एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करने के बजाय राजनीतिक पक्षपात कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए तर्क दिया है कि अधिकारी का आचरण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अजय पाल शर्मा फलता निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पहुंचे और उनके परिवार व समर्थकों को सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आए।
उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे “कायदे से खबर लेंगे।” बीजेपी ने जहाँ उन्हें ‘यूपी का सिंघम’ और ‘एन्काउंटर स्पेशलिस्ट’ बताकर उनके सख्त रुख की तारीफ की, वहीं तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें “बीजेपी का एजेंट” करार दिया है।
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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी अधिकारी के पुराने व्यक्तिगत वीडियो साझा कर उनके आचरण पर सवाल उठाए हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह चुनावी प्रक्रिया के बीच में दखल नहीं दे सकता, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अजय पाल शर्मा मतदाताओं और उम्मीदवारों को डरा-धमका रहे हैं, जिससे चुनाव का माहौल खराब हो रहा है। फिलहाल 4 मई को आने वाले नतीजों से पहले इस हाई-प्रोफाइल अधिकारी की भूमिका पर राजनीतिक और कानूनी घमासान तेज हो गया है।
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