राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार द्वीप दौरे से घबराई मोदी सरकार: कांग्रेस
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ग्रेट निकोबार द्वीप की यात्रा और वहां के स्थानीय समुदायों से उनकी मुलाकात के बाद केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह ‘घबराई’ हुई है और अब बचाव की मुद्रा में आ गई है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि राहुल गांधी के दौरे के ठीक तीन दिन बाद सरकार को इस विवादास्पद परियोजना पर एक स्पष्टीकरण (प्रेस नोट) जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो सरकार की बेचैनी को साफ तौर पर दर्शाता है।
राहुल गांधी ने 28 और 29 अप्रैल को ग्रेट निकोबार का दौरा किया था, जहां उन्होंने कैंपबेल बे में निकोबारी आदिवासी समुदाय के नेताओं और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की करीब 92,000 करोड़ रुपये की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को ‘देश की प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों में से एक’ करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर 160 वर्ग किलोमीटर में फैले प्राचीन वर्षावनों को तबाह किया जा रहा है और लाखों पेड़ों को काटने की योजना है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह केवल एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि उन समुदायों के अधिकारों को छीनने की कोशिश है जिन्होंने पीढ़ियों से इन जंगलों की रक्षा की है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल करने में पारदर्शिता की कमी रही है और आदिवासी समुदायों की सहमति दबाव में ली गई थी। जयराम रमेश के अनुसार, सरकार ने उन गंभीर चिंताओं का कोई जवाब नहीं दिया है जो पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और नागरिक समाज के विशेषज्ञों ने उठाई हैं।
कांग्रेस का दावा है कि इस परियोजना से विलुप्तप्राय ‘लेदरबैक कछुओं’ के प्रजनन स्थलों और निकोबार के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति होगी। पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मुद्दे पर संसद के पटल पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और स्थानीय लोगों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।
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दूसरी ओर, सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि यह परियोजना भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का तर्क है कि इससे अंडमान सागर में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी और यह व्यापारिक दृष्टि से एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।
हालांकि, कांग्रेस ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि सरकार अपने ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ को फायदा पहुंचाने के लिए देश की जैव विविधता और आदिवासियों के अधिकारों की बलि दे रही है। राहुल गांधी की इस यात्रा ने ग्रेट निकोबार परियोजना को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है, जिससे आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।
Rattled by @RahulGandhi’s visit to Great Nicobar Island on April 28, 2026, the Modi Govt issued a press release on the project and is now diverting attention away from the impending ecological disaster. Here is our detailed response to that press note of May 1, 2026. pic.twitter.com/6yeHEovgrj
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 3, 2026
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