गुना भाजपा में अंतर्कलह: सिंधिया की बैठक से विधायक-पार्षद गायब, नेताओं ने जताई नाराजगी
गुना से सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बंद कमरे में हुई बैठक से विधायक और पार्षदों के नदारद रहने पर नेताओं का आपसी कलह और दर्द खुलकर सामने आया, जिसके बाद बिगड़ते हालात देख सिंधिया को खुद उन्हें कड़ी नसीहत देनी पड़ी
नई दिल्ली: केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय गुना प्रवास के दौरान बंद कमरे में हुई भाजपा नेताओं की बैठक ने संगठन के भीतर सुलग रहे असंतोष और गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है।
तेलघानी स्थित एक होटल में आयोजित इस बैठक में संगठन की मजबूती के बजाय नेताओं ने अपनों के ही खिलाफ उपेक्षा और नाराजगी का गुबार निकाला, जिससे असहज होकर केंद्रीय मंत्री को कड़े लहजे में शिकायत करने की परंपरा छोड़ने की नसीहत देनी पड़ी।
सिंधिया ने दो टूक शब्दों में नेताओं से सकारात्मक काम गिनाने को कहा और याद दिलाया कि यह पार्टी अम्मा-महाराज के सिद्धांतों पर खड़ी हुई है। इस बैठक का सबसे चौंकाने वाला पहलू विधायक पन्नालाल शाक्य, प्रियंका मीना, पूर्व विधायकों और गुना नगरपालिका के अधिकांश भाजपा पार्षदों की अनुपस्थिति रहा, जो नपा अध्यक्ष की कार्यशैली और प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज होकर बैठक से दूर रहे।
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भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जिले में बढ़ते इस राजनीतिक असंतोष का मुख्य कारण प्रदेश कार्यकारिणी में गुना का प्रतिनिधित्व 10 से घटकर केवल तीन नेताओं (हरीसिंह यादव, महेंद्र सिंह सिसौदिया और गजेंद्र सिकरवार) तक सीमित होना और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत का उल्लंघन बताया।
बैठक के दौरान पूर्व कार्यसमिति सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं ने जिले के ध्वस्त हो चुके सूचना तंत्र, प्रोटोकॉल की कमी और अपनी ही सरकार में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर तीखे सवाल उठाए। असंतोष की यह आंच जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत तक भी पहुंची, जिन पर कार्यकर्ताओं से न मिलने और सरकारी कार्यक्रमों से स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को दूर रखने के आरोप लगे।
हालांकि, व्यापार प्रकोष्ठ और चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सिंधिया के दौरे का कार्यक्रम पहले मिलने पर जनता से जुड़े लाभकारी कार्यक्रम जोड़ने के सुझाव की केंद्रीय मंत्री ने सराहना की और इस व्यवस्था को और बेहतर करने का आश्वासन दिया।
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