पेपर लीक पर एक्शन: 4 राज्यों में बनेंगी फास्ट-ट्रैक कोर्ट, होगी रोज सुनवाई
पेपर लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए पीएम मोदी के ऐलान के बाद 4 राज्यों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव सामने आया है, जहाँ इन मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई होगी
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने के ऐलान के बाद इसकी रूपरेखा स्पष्ट होने लगी है।
छात्रों के जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने चार राज्यों (केंद्र शासित प्रदेश सहित) में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य मामलों की रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई कर दोषियों को रिकॉर्ड समय में कठोर सजा दिलाना है।
किन-किन क्षेत्रों में स्थापित होंगी ये अदालतें?
प्रस्ताव के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद और नागपुर बेंच, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के तहत प्राथमिकता के आधार पर ये फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित की जाएंगी।
केंद्र सरकार ने इस संबंध में संबंधित राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को संदेश भेजकर जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने और दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
नागपुर, कलकत्ता और दिल्ली में दर्ज हैं सर्वाधिक मामले
हालिया नीट (NEET) परीक्षा में हुए पेपर लीक से जुड़े सबसे ज्यादा मामले बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद व नागपुर बेंच तथा कलकत्ता हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार में दर्ज किए गए हैं।
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वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और प्रदर्शन से जुड़े मामले दर्ज हैं।
2024 के कड़े कानून के तहत होगी कार्रवाई
गौरतलब है कि परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ (The Public Examinations Act 2024) पहले से ही 21 जून 2024 से लागू है।
इस कानून के तहत UPSC, SSC, RRB, IBPS, केंद्रीय मंत्रालयों और NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं को शामिल किया गया है।
NTA की परीक्षाएं भी इसके दायरे में आने के कारण हालिया पेपर लीक और अनुचित साधनों से जुड़े मामलों में इसी कड़े कानून और फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए त्वरित न्याय दिया जाएगा।
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