ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व चेयरमैन और सदस्य के घर समेत 21 ठिकानों पर छापेमारी
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सरकारी नौकरी (पशु चिकित्सा अधिकारी) भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पूर्व अध्यक्ष और एक सदस्य के घरों पर छापा मारा है।
अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी पैसों के गलत लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच के लिए की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस भर्ती घोटाले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नया केस दर्ज करने के बाद कर्नाटक और गुजरात में करीब 21 ठिकानों पर एक साथ यह छापेमारी शुरू की है।
कहां- कहां मारे गए छापे?
तलाशी वाले ठिकानों में बंगलूरू में केपीएससी का ऑफिस, निलंबित किए गए केपीएससी चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस साहूकार और सदस्य शांता होसमनी के घर है।
इसके साथ ही कुछ कथित बिचौलिए, ‘एडुटेस्ट सॉल्यूशंस’ नाम की कंपनी (जो परीक्षा के पेपरों के डिजिटल मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार थी) का ऑफिस और वेटनरी ऑफिसर के पद के लिए चुने गए उम्मीदवार शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, ईडी की यह छापेमारी गुजरात के अहमदाबाद के साथ-साथ कर्नाटक के बंगलूरू, हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी और बेलगावी जैसे शहरों में कुल 21 ठिकानों पर चल रही है।
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ईडी ने यह बड़ी कार्रवाई बंगलूरू के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज उन चार एफआईआर (FIR) के आधार पर की है, जिनमें पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) की फाइनल भर्ती में बड़े घोटाले के आरोप लगाए गए थे।
क्या आरोप है?
आरोप है कि कुछ बिचौलियों ने शिकायतकर्ता समेत उम्मीदवारों को फोन किया। इसके साथ ही चयन के लिए 70 से 80 लाख रुपये (प्रति उम्मीदवार) की रिश्वत मांगी। अधिकारियों ने बताया कि मामले के शिकायतकर्ता ने पुलिस को इन बिचौलियों की ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपी है।
उन्होंने इसके अलावा ईडी इस घोटाले में पेपर लीक, ओएमआर (OMR) शीट में हेरफेर और केपीएससी (KPSC) अधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के आरोपों की जांच कर रही है।
जुलाई में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने अध्यक्ष साहूकार को निलंबित कर दिया था, क्योंकि उन पर अपनी दो बेटियों को अवैध तरीके से ‘औद्योगिक विस्तार अधिकारी’ (Industrial Extension Officer) बनवाने का गंभीर आरोप लगा था।
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