इंजीनियरिंग छात्रों पर सीएम रेवंत रेड्डी के बयान से राजनीतिक घमासान
इंजीनियरिंग की डिग्री और व्यावहारिक कौशल के बीच की खाई पर मुख्यमंत्री के एक विवादित बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है
तेलंगाना: मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा इंजीनियरिंग स्नातकों को लेकर दिए गए एक बयान पर राज्य की राजनीति में तूल पकड़ लिया है, जहां विपक्ष ने इसे छात्रों का अपमान बताया है, वहीं मुख्यमंत्री ने इसे शिक्षा व्यवस्था और कौशल की कमी से जुड़ा मुद्दा करार दिया है।
यह पूरा विवाद हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ, जहां मुख्यमंत्री शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के कौशल विकास पर अपने विचार रख रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि तेलंगाना में हर साल करीब 1.10 लाख युवा इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करते हैं, लेकिन उनमें से कई युवाओं के पास नौकरी पाने के लिए जरूरी बुनियादी कौशल की कमी होती है।
मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ऐसे युवाओं को एक साधारण नौकरी का आवेदन पत्र भरने के लिए भी कहा जाए, तो कई छात्र इसमें परेशानी महसूस कर सकते हैं।
इसी बात को समझाते हुए उन्होंने ‘क्रिमिनल वेस्ट’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद छिड़ गया।
बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से सफाई भी सामने आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद छात्रों को निशाना बनाना बिल्कुल नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करना था।
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उनका कहना था कि आज कई युवा डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी कौशल विकसित नहीं कर पाते, जिसका सीधा असर उनके रोजगार के अवसरों पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता को यह समझना होगा कि मौजूदा समय में सिर्फ बड़ी डिग्री काफी नहीं है, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए जरूरी स्किल और अनुभव भी होना चाहिए।
दूसरी ओर, इस बयान को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है।
बीआरएस नेता केटी रामा राव ने कहा कि लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करते हैं और उनके बारे में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है।
इसके साथ ही बीजेपी ने भी कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि इंजीनियर देश के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं और मुख्यमंत्री का यह बयान युवाओं के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाने वाला है।
फिलहाल, इस बयान के बाद राज्य में डिग्री और रोजगार के लिए जरूरी कौशल के बीच की खाई को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
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