ED ने गोवा अवैध खनन मामले में सालगांवकर ग्रुप की ₹1,023 करोड़ की संपत्ति जब्त की
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में अवैध लौह अयस्क खनन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सालगांवकर ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की भारत और सिंगापुर में स्थित 1,023.85 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है
नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में अवैध लौह अयस्क खनन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सालगांवकर ग्रुप (Salgaocar Group) और उससे जुड़ी कंपनियों की 1,023.85 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति को अस्थायी तौर पर अटैच (जब्त) कर लिया है।
ED द्वारा 19 जून को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया था, जिसकी जानकारी एजेंसी ने रविवार (21 जून) को दी।
यह कार्रवाई सलगांवकर ग्रुप और उससे जुड़े AVS ग्रुप पर बड़े पैमाने पर किए गए अवैध खनन और उससे अर्जित अवैध संपत्तियों के मामले में की गई है।
जब्त की गई संपत्तियों में भारत के साथ-साथ विदेशों में स्थित चल और अचल संपत्तियां शामिल हैं।
विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, इस कार्रवाई में भारत में मौजूद 459.10 करोड़ रुपए की 99 अचल संपत्तियां, सिंगापुर में स्थित 471.32 करोड़ रुपए की 31 अचल संपत्तियां और भारतीय कंपनियों में 93.42 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर शामिल हैं।
ये संपत्तियां स्वर्गीय अनिल सलगांवकर की एस्टेट (उनकी एडमिनिस्ट्रेटर लक्ष्मी अनिल सलगांवकर के माध्यम से), सलगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज़, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स, एस. कांतिलाल एंड कंपनी, सालिथो ओर्स, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स और सुवर्णरेखा पोर्ट के नाम पर थीं।
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मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला गोवा पुलिस की CID द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 और 2018 के अपने फैसलों में यह माना था कि 22 नवंबर 2007 के बाद (नए माइनिंग लीज़ जारी होने तक) गोवा में किया गया सभी माइनिंग कार्य गैर-कानूनी था।
ED की जांच में सामने आया कि AVS ग्रुप ने साल 2007-12 के दौरान दस माइनिंग लीज का संचालन किया और लौह अयस्क की गैर-कानूनी निकासी, बिक्री व निर्यात से 2,492.95 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गैर-कानूनी तरीके से निकाले गए लौह अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में बनाई गई कागजी शेल कंपनियों (स्पेशल पर्पस व्हीकल्स) को बेहद कम कीमत पर निर्यात किया गया था।
बाद में इन कंपनियों ने इसे चीन को दोबारा बेचकर 2,744.89 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा कमाया। इस तरह एजेंसी के अनुसार अपराध से प्राप्त कुल धनराशि (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) 5,237.84 करोड़ रुपए आंकी गई है।
ED का आरोप है कि इन फंड्स को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और सिंगापुर स्थित SPV के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाया गया, जिसका उपयोग विदेशों में चल और अचल संपत्तियों को खरीदने में किया गया, जबकि इसका कुछ हिस्सा शेयर कैपिटल के तौर पर वापस भारत भेज दिया गया था।
इसी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ED ने भारत और सिंगापुर की इन संपत्तियों को कुर्क किया है।
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