पीएम मोदी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, 700 प्रबुद्ध नागरिको ने की शिकायत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में राष्ट्र के नाम दिए गए एक संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन पर चुनावी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा है।
इस मामले में देश के लगभग 700 प्रबुद्ध नागरिकों, जिनमें पूर्व नौकरशाह, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं, ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
आरोप है कि चुनाव के दौरान (तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मतदान से ठीक पहले) पीएम ने दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सरकारी ब्रॉडकास्टर्स का उपयोग राजनीतिक संदेश देने के लिए किया।
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के गिरने का मुद्दा उठाया और विपक्षी दलों (कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके) पर सीधा हमला किया। विपक्ष का तर्क है कि यह एक “चुनावी भाषण” था जिसे सरकारी मंच से नहीं दिया जाना चाहिए था।
शिकायतकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाने और आचार संहिता लागू होने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी माध्यमों का उपयोग करके राष्ट्र को संबोधित करना निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
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इन नागरिकों ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि इस प्रकार के संबोधन से सत्ताधारी दल को अन्य दलों की तुलना में अनुचित लाभ मिलता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनाव आयोग के नियमों के विरुद्ध है।
पत्र में चुनाव आयोग से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग राजनीतिक संदेश फैलाने के लिए किया गया है, जो सीधे तौर पर आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन प्रतीत होता है।
फिलहाल इस भारी विरोध और सामूहिक शिकायत पर चुनाव आयोग के आधिकारिक रुख और आगामी निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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