बाढ़ से हाहाकार, नेपाल में विदेशी एक्सपर्ट्स संभालेंगे कमान
नई दिल्ली: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण 579 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और इस आपदा में 1900 से अधिक लोग अब भी लापता है, जिनमें लगभग 30 अलग-अलग देशों के नागरिक शामिल है। इस भयानक के बीच, भारत के कई पर्यटक सुरक्षित अपने देश वापस लौट आए है, उन्होंने राहत की सांस तो ली है, लेकिन वहां जलप्रलय का जो मंजर देखा, उसकी बेहद डरावनी कहानी बताई है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि प्रदेश के 12 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका नेपाल में पता नहीं चल सका है और सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। इसी प्रकार, उत्तराखंड सरकार ने भी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के लगातार संपर्क में है।
तमिलनाडु के मंत्रियों ने चेन्नई हवाई अड्डे पर सुरक्षित लौटे 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत किया, जिन्होंने बाढ़ के तेज बहाव और हेलीकॉप्टर से हुए रेस्क्यू का भयानक अनुभव साझा किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रयासों से नागरिकों की समय पर सुरक्षित भारत वापसी संभव होने की बात कही।
मानवीय सहायता के तहत, भारतीय वायु सेना का एक सी-130 विमान दवाओं और खाद्य पदार्थों सहित 10 टन आवश्यक राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हो गया है। इसके अलावा, नेपाल सरकार के अनुरोध पर चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल भी शनिवार को नेपाल पहुंच गया है।
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उधर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य के लापता 39 पर्यटकों में से दो से संपर्क हो गया है, जबकि 37 अब भी लापता हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह तत्पर है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल की मदद की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बाढ़ को देखते हुए तुरंत 150,000 अमेरिकी डॉलर की मदद दी है, इसके साथ ही दवाइयाँ और राहत सामग्री भी भेजी है।
विदेशी नागरिकों के लापता होने के बढ़ते दबाव के बाद, नेपाल सरकार अब विदेशी देशों की मदद लेने के लिए तैयार हो गई है, इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स की मदद की जाएगी। हालांकि, त्रिशुली नदी में भारी बारिश और खराब मौसम के कारण अभी बचाव कार्य को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा है।
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