दिल्ली दंगा केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने ख़ारिज की जमानत अर्जी , सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव से इनकार
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगो की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है।
हाई कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें खारिज करते हुए एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की जांच के बाद ही आवेदन करने की छूट दी थी, और चूंकि ये शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए जमानत देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने जैसा होगा।
पुराने अदालती फैसलों का हवाला नामंजूर
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई गलती न पाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देना परिस्थितियों में बदलाव नहीं माना जा सकता, क्योंकि अलग मामले का फैसला इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को रद्द नहीं कर सकता। ट्रायल में देरी के आधार पर मांगी गई इन याचिकाओं के खारिज होने का यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने उनकी अपील को नामंजूर किया है।
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दिल्ली दंगा मामले में चल रही अदालती सुनवाई के दौरान शरजील इमाम के वकील ने दलील दी कि केस के अधिकांश आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है और ट्रायल आगे न बढ़ने के कारण इमाम को भी राहत मिलनी चाहिए।
वही सरकारी पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है। उन्होंने दलील दी कि कोर्ट के पिछले आदेशों के अनुसार, सुरक्षा प्राप्त गवाहों के बयान दर्ज होने या जनवरी 2027 की समयसीमा से पहले इन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
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