महिला सुरक्षा पर एलजी का एक्शन: दिल्ली के कॉलेजों के पास पिंक बूथ और पाक्षिक समीक्षा
नई दिल्ली: दिल्ली में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उपराज्यपाल टीएस संधू ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक की है। इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, महिला कॉलेजों के प्रिंसिपल्स और दिल्ली पुलिस, पीडब्ल्यूडी , डीडीए व् परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान छात्राओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए,जिसमे खासतौर पर कॉलेज की छात्राओं के लिए एक नया सुरक्षा ऐप विकसित करने का बड़ा फैसला लिया गया।
कालकाजी मंदिर की घटना के बाद बड़ा कदम
हाल ही में कालकाजी मंदिर के पास एक नाबालिग से हुए कथित दुष्कर्म के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच, उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों के आसपास छात्राओं के सुरक्षित आवागमन और बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए कई कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अहम बैठक में ई-रिक्शा और ऑटो द्वारा जबरन सवारी लेने, सुरक्षित लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी, अतिक्रमित रास्तों, अंधेरे स्थानों और पुलिस गश्त की कमी जैसी जमीनी समस्याओं पर चर्चा करते हुए एलजी ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और एमसीडी को रास्तों की स्ट्रीट लाइटें ठीक करने, सीसीटीवी कवरेज बढ़ाने और कॉलेजों की दीवारों के पास की झाड़ियों व आपत्तिजनक ग्रैफिटी को साफ करने के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस गश्त और पिंक बूथ पर जोर
इसके साथ ही, पुलिस को सुबह-शाम गश्त व पीसीआर बढ़ाने, हर कॉलेज के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने, पिंक बूथ और सादे कपड़ों में निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है, जबकि एमसीडी को अवैध ढांचों, पास के कूड़ाघरों और पुरुष सार्वजनिक शौचालयों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन व्यवस्था सुधारने के लिए मेट्रो स्टेशनों तक बेहतर कनेक्टिविटी, शटल सेवाएं, ई-रिक्शा के लिए पिक-अप पॉइंट और छात्राओं के लिए इमरजेंसी अलर्ट व जीपीएस युक्त सेफ्टी ऐप तैयार करने का भी फैसला लिया गया है, साथ ही उत्तर और दक्षिण कैंपस को मिलाकर एक इंटर-कॉलेज वुमेन सेफ्टी कमेटी बनाने तथा हर पखवाड़े इन उपायों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ताजा आकड़ो के अनुसार इस साल 15 सितंबर तक राजधानी में यौन शोषण के कुल 1,020 आपराधिक मामले सामने आ चुके है। इन आंकड़ों में गंभीर बलात्कार और पॉक्सो कानून से जुड़े अपराध भी शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि कुल मामलों में से 653 केस सीधे तौर पर बच्चों के साथ हुई यौन हिंसा से संबंधित हैं।
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