अमित शाह से जुड़े मानहानि केस में राहुल गांधी बरी; सुल्तानपुर कोर्ट से बड़ी राहत
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर (MP/MLA) कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़े मानहानि केस में बरी कर दिया है। विशेष अदालत के जज शुभम वर्मा ने आज (26 अक्टूबर 2026) फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि राहुल गांधी का बयान मानहानि के दायरे में नहीं आता है।
यह मामला साल 2018 का है, जब कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर एक विवादित बयान दिया था।
अदालत का यह अंतिम फैसला आने के दौरान राहुल गांधी खुद कोर्ट रूम में उपस्थित थे।
इस ऐतिहासिक राहत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुल्तानपुर कोर्ट के बाहर जमकर पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया, जिसके बाद राहुल गांधी लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
इससे पहले, कोर्ट आते समय पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले की पांच गाड़ियां और एक एंबुलेंस आपस में टकरा गई थीं, हालांकि इस हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
यह टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़ी थी. अमित शाह को 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था। राहुल गांधी के बयान को लेकर स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
करीब आठ साल तक चली कानूनी लड़ाई
सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था. 20 फरवरी 2024 को अदालत में पेश होने के बाद उन्हें जमानत मिल गई।
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जुलाई 2024 में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज कराया और आरोपों से इनकार किया। उनका पक्ष था कि शिकायत राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने गवाह और साक्ष्य पेश किए।
ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को इस केस से पूरी तरह बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि राहुल गांधी के इस बयान को मानहानि के दायरे में नहीं माना जा सकता।
इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े इस आपराधिक मानहानि मुकदमे की सारी कानूनी कार्यवाही अब निचली अदालत में पूरी तरह खत्म हो गई है।
इससे पहले, शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की आवाज का सैंपल लेकर रिकॉर्डिंग से मिलाने की मांग की थी, जिसे ट्रायल कोर्ट, निचली अदालत और हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की आखिरी बहस सुनने के बाद कोर्ट ने 26 अक्टूबर को फैसले की तारीख तय की थी। अब यदि शिकायतकर्ता चाहे, तो इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकता है।
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