रिजिजू का तीखा सवाल: ‘अगर वोटर लिस्ट सही थी, तो 2014 में क्यों हारी कांग्रेस’
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और वोटर लिस्ट की जांच को लेकर देश में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इस बीच 1 नवंबर को रामलीला मैदान में राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाली विपक्ष की बड़ी रैली से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है ।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सामने पांच बड़े सवाल रखे हैं और चुनौती दी है कि पार्टी इनका जवाब दे। रिजिजू ने कांग्रेस से पिछले चुनाव में उसकी हार, चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर चुनाव आयोग में गड़बड़ी है, तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर कैसे सिमट गई थी जबकि उस समय तो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति खुद कांग्रेस सरकार ने ही की थी।
मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि जब 2024 में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब भी पार्टी को लगातार तीसरी बार चुनाव में हार का सामना क्यों करना पड़ा उन्होंने सवाल किया कि क्या 2014 से 2026 के बीच बनी सरकारों के लिए कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्रियों को इस्तीफा देकर माफी मांगनी चाहिए।
इसके अलावा, रिजिजू ने मतदाता सूची पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अवैध प्रवासियों, मृत लोगों, स्थानांतरित मतदाताओं और दोहरे नामों को वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जाना चाहिए उन्होंने 1952 से 2004 के बीच कराए गए पूर्ववर्ती विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियानों की वैधता पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि एक परिवार की पार्टी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर भारतीय लोकतंत्र और संविधान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
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व्यापारियों में भारी चिंता
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में काफी चिंता है। व्यापारियों के बड़े संगठन सीटीआई (CTI) ने अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे सहित विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को चिट्ठी भेजकर इस रैली को दिवाली के बाद रखने की मांग की है।
संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने साफ किया कि कारोबारी रैली के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन धनतेरस और दिवाली के ठीक पहले का यह समय साल का सबसे बड़ा बिजनेस सीजन होता है।
उनका कहना है कि इस त्योहार के पीक समय पर रैली होने से दिल्ली के 20 ऐतिहासिक बाजारों का रोजाना होने वाला करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
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