सीएम विजय की सरकारी बैठकों में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर डीएमके ने उठाए सवाल
बिना किसी आधिकारिक पद के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के करीबियों द्वारा गोपनीय सरकारी बैठकों में शामिल होने पर डीएमके ने तीखे सवाल उठाते हुए विवाद खड़ा कर दिया है
तमिलनाडु: मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की प्रशासनिक और रणनीतिक टीम को लेकर राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
डीएमके ने आरोप लगाया है कि जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी जैसे गैर-आधिकारिक लोग मुख्यमंत्री की कैबिनेट और उच्च स्तरीय गोपनीय बैठकों में शामिल हो रहे हैं, जो सरकारी गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन है।
डीएमके नेता आर. एस. भारती ने इस मामले में डीजीपी से शिकायत कर एफआईआर की मांग की है, जबकि सांसद विल्सन ने मुख्यमंत्री कार्यालय के पास इन्हें कमरे आवंटित किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
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इसके जवाब में टीवीके (TVK) का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और सरकार ने दोनों को बैठकों में शामिल होने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का सवाल है कि यदि ऐसे आदेश मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा।
विवाद सिर्फ इन दो नामों तक सीमित नहीं है; सीएम के लंबे समय तक मैनेजर रहे जगदीश पलानीस्वामी ने सोशल मीडिया पर खुद को मुख्यमंत्री का निजी सचिव घोषित किया है, जिसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
इसके अलावा, विजय की आगामी फिल्म ‘जना नायकन’ के निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधि (कैबिनेट रैंक) और सिनेमैटोग्राफर मनोज परमहंसा को एमजीआर फिल्म इंस्टीट्यूट का प्रमुख बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द पांच बेहद प्रभावशाली लोग सक्रिय हैं—जिनमें वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म सहयोगी और एक वामपंथी पूर्व सांसद शामिल हैं—जो बिना किसी आधिकारिक पद के भी सरकार के प्रशासनिक और रणनीतिक फैसलों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
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