चंदे में हेराफेरी पर अखिलेश का तंज: बोले— ‘ये दिल्ली बनाम लखनऊ के बीच पावर की लड़ाई’
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी को लेकर भाजपा और सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे दिल्ली और लखनऊ के बीच सत्ता के वर्चस्व की लड़ाई करार दिया है
लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के संवेदनशील मामले पर उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र व राज्य सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और मीडिया के समक्ष बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि सच तो यह है कि आम जनता के चढ़ावे, आस्था के चंदे और पवित्र योगदान की बदौलत पलने वाला चोरों का यह पूरा गैंग इस समय जनता के भारी गुस्से और आक्रोश का सामना नहीं कर पा रहा है।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि यह गैंग जनता के इस तीखे गुस्से से अंदरूनी तौर पर इतना ज्यादा डरा और घबराया हुआ है कि इसी डर के मारे इसके बड़े-बड़े नेता अपने-अपने घरों के अंदर दुबके हुए हैं और बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को दिल्ली और लखनऊ के बीच छिड़ी वर्चस्व की एक बड़ी राजनीतिक जंग करार दिया।
उन्होंने अंदरूनी खींचतान पर बड़ा तंज कसते हुए कहा कि यह पूरी तरह से पावर यानी सत्ता की लड़ाई है, जहां दिल्ली में बैठे शीर्ष नेता अभी कोई नया प्लान या रणनीति बना भी पाते, उससे पहले ही लखनऊ में बैठे सत्ताधीश ने चालाकी से सब कुछ पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया।
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चंदे की हेराफेरी की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करते हुए सपा मुखिया ने पूछा कि आखिर यह एसआईटी (SIT) क्या है और इसकी निष्पक्षता कितनी है।
उन्होंने कूटनीतिक सवाल दागते हुए कहा कि अगर इस पूरे घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या आयकर विभाग (Income Tax) जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसियां शामिल होतीं, तो जांच की असली बागडोर किसके हाथ में होती।
अखिलेश ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि इस एसआईटी जांच में कंट्रोल पूरी तरह किसके हाथ में है, यह हर कोई जानता है और यह पूरा ड्रामा केवल और केवल पावर की अंदरूनी लड़ाई को छिपाने के लिए किया जा रहा है।
विपक्षी दल के इस सीधे और बेहद गंभीर हमले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है, हालांकि सत्तारूढ़ दल की तरफ से इस पर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक पलटवार सामने नहीं आया है।
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