बंगाल चुनाव में धांधली का आरोप: कांग्रेस ने पीएम-शाह को घेरा, सीईसी से मांगा इस्तीफा
नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशान साधते हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावो में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए है। पार्टी का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में चुनावी प्रक्रिया में जमकर हेरफेर किया गया।
इस मामले पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि केवल सामने दिख रहे ‘पुतले’ को पद से हटाना काफी नहीं होगा, बल्कि परदे के पीछे से खेल चला रहे दोनों ‘मुख्य किरदारों’ (सूत्रधारों) को भी जनता के सामने पूरी तरह जवाबदेह बनाना होगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एसआईआर अपीलों की सुनवाई के लिए नियुक्त ट्रिब्यूनल के न्यायाधीशों ने 27 लाख हटाए गए मतदाताओं के मामलों से जुड़े चुनाव आयोग के आईटी पोर्टल में कई गंभीर खामियां पाई हैं।
चुनावी धांधली के आरोपों पर विपक्ष का हल्लाबोल
रमेश ने इसे ‘बड़े पैमाने पर हेरफेर और धांधली’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त को आड़े हाथों लिया और कहा कि पुतले के साथ-साथ इन दो सूत्रधारों को भी जवाबदेह ठहराना होगा।
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इसी मांग के तहत उन्होंने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के लिए INDIA गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के साथ चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने संसद परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि वे लोग काफी घबराए हुए हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। अदालत ने साफ किया है कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी तरह के बदलाव को अपनी अनुमति नहीं दी थी।
इसी बात को मुद्दा बनाकर विपक्षी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के राजनीतिक दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओ का कहना है कि उन्होंने संविधान के नियमों के खिलाफ जाकर एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के लिए फॉर्म में अपनी मर्जी से एकतरफा फेरबदल किए हैं, इसलिए उन्हें अपने पद से तुरंत हट जाना चाहिए।
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