भारी हंगामे के बीच संसद के मानसून सत्र में हुई अब तक बैठकों में 88 बार सदन स्थगित
संसद में मानसून सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ते टकराव के कारण कामकाज पर असर पड़ रहा है मानसून सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में राजयसभा 46 बार और लोकसभा 42 बार यानि टोटल 88 बार स्थगित हुई है
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का सीधा असर कामकाज पर पड़ रहा है। सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में लोकसभा 42 बार और राज्यसभा 46 बार यानी कुल 88 बार स्थगित हुई है। दोनों सदनों में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे कामकाज की उम्मीद होती है, लेकिन हंगामे के कारण औसतन केवल एक-एक घंटा ही काम हो सका।
भारी हंगामे के बीच विपक्ष और स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी
आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में इन बैठकों के दौरान एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल पाया। हालांकि दोनों सदनों में कुल 10 विधेयक पारित हुए, लेकिन भारी हंगामे के कारण विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। सत्र के दौरान नीट पेपर लीक के मुद्दे पर करीब 20 घंटे चर्चा हुई, लेकिन ज्यादातर समय सियासी आरोप-प्रत्यारोप में ही बीत गया।
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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का आरोप है कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में विधेयकों पर सहमति जताने के बाद सदन में हंगामा करता है। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर टकराव का आरोप लगाते हुए नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान हुई कथित ज्यादतियों पर गृह मंत्री के सदन में बयान की मांग की है। मानसून सत्र का एक बड़ा हिस्सा इस गतिरोध की भेंट चढ़ चुका है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बाकी बैठकों में दोनों पक्ष मिलकर जनहित के मुद्दों पर सामान्य चर्चा सुनिश्चित कर पाएंगे।
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