घपलाखोरों में जुड़ा एक और नाम, कौन हैं राजेश मेहता जिन पर लगा है 15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले में बैन लगाया है। इस पूरे विवाद और सरकारी कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम पर इसके पूरे असर को समझने के लिए पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली: शेयर बाजार नियामक सेबी ने देश की प्रमुख आभूषण कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और इसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ एक कड़ा अंतरिम एकतरफा आदेश जारी किया है।
कंपनी पर वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और फंड की हेराफेरी का गंभीर आरोप है। हालांकि, कंपनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है, लेकिन इस खबर के सामने आते ही कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी 109 पेजों के अंतरिम आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने कई वर्षों तक गैर-वास्तविक लेनदेन किए, संदेहास्पद अकाउंटिंग की और प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं के जरिए फंड को डायवर्ट किया।
इन गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के कारण राजेश मेहता को अगले आदेश तक आरईएल की प्रतिभूतियों की खरीद, बिक्री या किसी भी तरह के सौदे करने से रोक दिया गया है। सेबी का मानना है कि मेहता ही कंपनी में मुख्य निर्णय लेने वाले व्यक्ति हैं और उनका रोजमर्रा के कामकाज पर पूरा नियंत्रण है।
इस मामले में राजस्व में हेराफेरी का पैमाना बेहद चौंकाने वाला है। सेबी के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच जो 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व गलत तरीके से प्रस्तुत किया, वह इस अवधि के दौरान रिपोर्ट किए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8% है।
नियामक का कहना है कि कंपनी का लगभग 97 से 99 प्रतिशत राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था, जो कि कॉर्पोरेट इतिहास में अभूतपूर्व है।60 वर्षीय राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था।
उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने सबसे बड़े भाई से मात्र 1,200 रुपये उधार लेकर अपने भाई प्रशांत के साथ चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया था। 1995 में कंपनी ने अपना आईपीओ लाकर 10 करोड़ रुपये जुटाए और पूंजी बाजार में कदम रखा।
इसे भी पढ़ें: यूपी में मौसम का यू-टर्न: IMD ने जारी किया आंधी-तूफान और भारी बारिश का अलर्ट
कंपनी को सबसे बड़ी वैश्विक पहचान साल 2015 में मिली जब उसने 400 मिलियन डॉलर के ऑल-कैश डील में प्रसिद्ध स्विस रिफाइनरी ‘वालकैम्बी’ का अधिग्रहण किया। फोर्ब्स के अनुसार, अक्टूबर 2019 तक मेहता की कुल संपत्ति 1.57 बिलियन डॉलर आंकी गई थी।
सेबी ने अपने आदेश में आरईएल के वैधानिक ऑडिटर्स के असहयोग का भी विशेष रूप से जिक्र किया है। ऑडिटर्स ने पूछताछ के दौरान ऑडिट वर्किंग पेपर उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।
सेबी का कहना है कि इस तरह का लगातार असहयोग महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने और जांच में बाधा डालने के इरादे को दर्शाता है। इसके अलावा, नियामक द्वारा बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कंपनी ने भी फंड फ्लो को समझाने वाले सही वित्तीय दस्तावेज पेश नहीं किए।
निवेशकों और एलआईसी पर असर
सेबी के इस कड़े आदेश का सीधा और नकारात्मक असर शेयर बाजार पर देखने को मिला। खबर सार्वजनिक होते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5% का लोअर सर्किट (तेज गिरावट) दर्ज किया गया।
इस विवाद का सीधा असर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पर भी पड़ा है, क्योंकि नवीनतम शेयरधारिता डेटा के अनुसार, एलआईसी की इस कंपनी में 10.80% की बड़ी हिस्सेदारी है। नतीजतन, एलआईसी के शेयरों में भी 1% से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
दूसरी ओर, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह आदेश अभी केवल अंतरिम है और कंपनी द्वारा घोषित राजस्व पूरी तरह सही है, इसे बिल्कुल भी बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है।
“सेबी और कंपनी के बीच कुछ संचार की कमी (कम्युनिकेशन गैप) और भ्रम प्रतीत होता है। कंपनी सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज जमा करके सेबी के सामने सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में है। नियामक द्वारा अभी किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।”
राजेश एक्सपोर्ट्स का यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय रिपोर्टिंग की पारदर्शिता पर बहुत गंभीर सवाल खड़े करता है। एक समय पर वैश्विक स्तर पर धाक जमाने वाली इस कंपनी और इसके लाखों निवेशकों का भविष्य अब सेबी की आगामी विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
