बकरीद पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खुले में पशु वध पर रोक, कहा- गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं
नई दिल्ली: कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 मई 2026 को आगामी बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मद्देनजर एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है।
चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा पशु वध नियमों को कड़ाई से लागू करने के नोटिस पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
इस बड़े फैसले के तहत कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए बेहद स्पष्ट रूप से कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम या बकरीद का कोई अनिवार्य धार्मिक हिस्सा या आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने सरकारी नोटिस में इस बिंदु को साफ तौर पर शामिल करे।
इसके अलावा कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि सड़कों, मैदानों या किसी भी खुले और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं (गाय और भैंस समेत) का वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कुर्बानी केवल उन्हीं अधिकृत बूचड़खानों (Slaughterhouses) या चिन्हित स्थानों पर दी जा सकेगी, जिन्हें प्रशासन से मंजूरी मिली हो और जहां ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ की पूरी व्यवस्था हो।
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हालांकि कोर्ट ने 13 मई के सरकारी कड़े नियमों वाले नोटिस पर रोक लगाने से मना कर दिया, लेकिन मुस्लिम समुदाय की आर्थिक और धार्मिक सहूलियत को देखते हुए राज्य सरकार को एक विशेष निर्देश भी दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार ‘पशु वध नियंत्रण अधिनियम’ की धारा 12 के तहत त्योहार के लिए अन्य पशुओं (जैसे भैंस, बैल आदि) के वध नियमों में दी जाने वाली “छूट” पर अगले 24 घंटे के भीतर अंतिम निर्णय ले, क्योंकि त्योहार 27-28 मई को ही होने वाला है।
इस मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने 13 मई को आदेश जारी किया था कि बिना ‘फिट सर्टिफिकेट’ (पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक या पूरी तरह अक्षम होना) के किसी भी मवेशी का वध नहीं होगा।
इसके खिलाफ कुछ नेताओं और याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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