ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को फिर घेरा
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना’ को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस परियोजना को दी गई पर्यावरण मंजूरी को पूरी तरह से अनुचित और ‘विज्ञान का अपमान’ करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने व्यापक और सटीक वैज्ञानिक अध्ययनों को दरकिनार करते हुए जल्दबाजी में इस मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई है, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। उनके अनुसार, जिस तरह से प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई है, वह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि संवैधानिक और कानूनी मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से स्पष्ट किया कि 72,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत प्रस्तावित बंदरगाह, हवाई अड्डा और टाउनशिप द्वीप के जैव विविधता वाले वर्षावनों और समुद्री जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगी।
उन्होंने विशेष रूप से ‘लेदरबैक कछुओं’ और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के आवास नष्ट होने का मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जब कई विशेषज्ञ समितियों और वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता पर चिंता जताई थी, तो उन रिपोर्टों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया या उन पर विचार क्यों नहीं किया गया।
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उन्होंने इसे सरकार की ‘विकास की अंधी दौड़’ बताते हुए कहा कि अधूरे और पक्षपाती आंकड़ों के आधार पर पारिस्थितिक तंत्र के साथ खिलवाड़ करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति अन्याय है।
सरकार के रुख पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यावरणीय रूप से असुरक्षित है, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी इसके दावों में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने मांग की कि इस पूरी योजना की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और जब तक विश्वसनीय वैज्ञानिक अध्ययन पूरे नहीं हो जाते, तब तक इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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