जजों को गाली देने वाले युवक का ईमेल लीक, लड़कियों को परेशान करने पर छूटी थी नौकरी

जजों को गाली देने वाले युवक का ईमेल लीक, लड़कियों को परेशान करने पर छूटी थी नौकरी

पूरे देश में हाईलाइट होने और अपने मामले को उछालने की सोची-समझी प्लानिंग के तहत ही आरोपी प्रबल खुद केस लड़ने का आवेदन देकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने अपशब्द कहने वाला आरोपी प्रबल प्रताप यादव इटावा के नगला जयलाल (भाली भरथना) का रहने वाला है और वह एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत सुप्रीम कोर्ट गया था। पुलिस को छानबीन में प्रबल की एक ईमेल मिली है, जिसमें उसने स्पष्ट लिखा था कि वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा ताकि पूरे देश में हाईलाइट हो सके।

अपने प्रकरण को उछालने की नीयत से ही उसने अपना मामला खुद लड़ने के लिए आवेदन किया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रबल पहले विकासनगर स्थित डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी में काम करता था, जहां नौकरी के दौरान उसने एक हिंदू और एक मुस्लिम युवती को परेशान किया था।

दोनों युवतियों की लिखित शिकायत के बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया था, जिसका बदला लेने के लिए प्रबल ने कंपनी पर भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी और गबन के कई आरोप लगाए।

इस कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियमितता की एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रबल ने सबसे पहले स्पेशल सीजेएम कस्टम की अदालत में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने इसे एफआईआर के बजाय परिवाद के रूप में दर्ज किया, जिससे नाराज होकर वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंचा।

जब हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी, तो वह पुलिस कमिश्नर से केस दर्ज कराने के निर्देश की मांग करने लगा। वहां भी मांग पूरी न होने पर वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शुक्रवार को बहस के दौरान उसने जजों से बदसलूकी की और अपशब्द कहे।

दूसरी ओर, प्रबल प्रताप के पिता सुरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि उनका बेटा काफी समय से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इसी बीच वह किसी साइबर फ्रॉड का शिकार भी हो गया था, जिसकी शिकायत पुलिस में करने के बावजूद कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

इसी वजह से वह अत्यधिक तनाव में था और शायद इसी मानसिक दबाव के कारण उससे कोर्ट में यह बड़ी गलती हो गई। सुरेंद्र ने बताया कि उनकी दो बेटियां शादीशुदा हैं और परिवार के पास सिर्फ दो बीघा खेती है। घर की माली हालत सुधारने के लिए प्रबल लगातार पढ़ाई कर अच्छी नौकरी की तलाश में था।

प्रबल ने तीन साल पहले जिले के चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज से बीएड किया था और सरकारी नौकरी न मिलने पर वह दो साल पहले लखनऊ विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई करने चला गया था। वहां वह कैंपस के पास किराए के कमरे में रहकर ट्यूशन पढ़ाता था और एक निजी कंपनी में नौकरी भी करता था।

प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह ने भी बताया कि साइबर फ्रॉड की शिकायत लेकर वे संबंधित थाने से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक गए, लेकिन जब किसी ने नहीं सुना तो प्रबल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। निचली अदालत और हाईकोर्ट से न्याय न मिलने के कारण हताश होकर ही वह सुप्रीम कोर्ट गया था।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं