निर्यात ठप और बेमौसम बारिश की मार; तबाह होने की कगार पर महाराष्ट्र का ‘Onion Belt’

निर्यात ठप और बेमौसम बारिश की मार; तबाह होने की कगार पर महाराष्ट्र का ‘Onion Belt’

बेमौसम बारिश और पश्चिम एशिया तनाव के कारण निर्यात ठप होने से महाराष्ट्र में प्याज के दाम 4 से 8 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं, जिससे लागत (18 रु/किलो) न निकलने से किसान भारी घाटे और वित्तीय संकट में हैं। 1,500 रुपये प्रति क्विंटल संकट बिक्री मुआवजा देने की मांग की है।

मुंबई: महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों से आ रही तस्वीरें और खबरें इस बात का साफ सबूत हैं कि देश के अन्नदाता पर इस समय आर्थिक मुसीबत का बहुत बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है।

थोक मंडियों में प्याज के दामों में आई रिकॉर्ड गिरावट ने नासिक, सोलापुर और पुणे जैसे क्षेत्रों के हजारों किसानों को खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया है। मंडियों में प्याज की बंपर आवक तो हो रही है, लेकिन उचित खरीदार न मिलने और कौड़ियों के भाव बोली लगने के कारण किसान बेहाल हैं।

हालत यह हो चुकी है कि उन्हें अपनी फसल की लागत निकालना भी नामुमकिन लग रहा है, जिससे कई परिवारों के सामने दिवालिया होने का गंभीर संकट मंडराने लगा है।

इस सीजन में महाराष्ट्र के पूरे प्याज उत्पादक बेल्ट (Onion Belt) के हाथ केवल भारी निराशा और घाटा ही लगा है। किसानों की इस बदहाली के पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

पहला यह कि फसल तैयार होने के समय हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने प्याज की गुणवत्ता (क्वालिटी) को काफी नुकसान पहुंचाया। दूसरा और सबसे बड़ा कारण यह है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालातों की वजह से विदेशों में प्याज का निर्यात बुरी तरह ठप हो गया है। मांग घटने के कारण थोक मंडियों में प्याज के दाम उत्पादन लागत के मुकाबले काफी नीचे गिर गए हैं।

मंडियों में चल रही इस बेकद्री के बीच नासिक और सोलापुर से कई ऐसी मर्मांतक कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

पाथन तालुका के एक पीड़ित किसान का मामला इस समय सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने मंडी में कुल 1,262 किलोग्राम प्याज बेची।

लेकिन जब उसके हाथ में अंतिम बिल आया, तो सब टैक्स और मंडी का भाड़ा काटकर उसके खाते में ‘माइनस 1 रुपया’ (-1 रु) दर्ज था।

यानी फसल बेचने के बाद उसे जेब से पैसे देने पड़ गए।इसी तरह, सताना एपीएमसी (APMC) मंडी पहुंचे किसान जितेंद्र सोलंकी को अपना 30 क्विंटल प्याज महज 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा, जबकि इसे उगाने में उनका 1,200 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आया था। उन्हें सीधे तौर पर 36,000 रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

देश ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी मानी जाने वाली नासिक की लासलगांव एपीएमसी में भी इस समय हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।

मंडी में प्याज का भाव कहने को तो 400 रुपये से लेकर 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि करीब 80 प्रतिशत प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 8 रुपये प्रति किलो) से भी कम में बिक रहा है।

सोलापुर मंडी में भी हजारों क्विंटल प्याज की आवक के बीच भाव औंधे मुंह गिरे हुए हैं।

महाराष्ट्र ऑनियन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक, एक किलो प्याज उगाने और मंडी तक लाने का ब्रेक-ईवन खर्च (लागत) करीब 18 रुपये प्रति किलो आता है, जबकि इस समय अधिकांश किसान अपना प्याज 4 से 8 रुपये प्रति किलो में बेचने को मजबूर हैं।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि बेमौसम मौसम के कारण इस बार ‘ग्रेड-1’ (उच्च गुणवत्ता) के प्याज की मात्रा बहुत कम है, ऊपर से युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार बंद होने से निर्यात को बड़ा झटका लगा है।

इस गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहे किसानों ने अब केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।

किसानों की मांग है कि सरकार तुरंत दखल देकर प्याज के लिए 3,500 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करे। इसके साथ ही, जिन किसानों को मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी है, उन्हें 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से संकट बिक्री मुआवजा दिया जाए।

किसानों का कहना है कि अगर राज्य सरकार ने जल्द ही किसी विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं की, तो यह संकट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर देगा।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।