एक्सप्रेसवे विवाद: “सैफई परिवार जमीन ‘खाने’ में अनुभवी, राजभर ने अखिलेश को घेरा”
मप्र जमीन खरीद विवाद में घिरे मुख्यमंत्री मोहन यादव का अखिलेश यादव द्वारा बचाव किए जाने पर अब ओपी राजभर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है
नई दिल्ली: मप्र जमीन खरीद विवाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम आने और अखिलेश यादव द्वारा उनका बचाव किए जाने के बाद अब इस मामले में सियासी घमासान शुरू हो गया है।
यूपी कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर ने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव इस मामले पर इतना हल्ला क्यों कर रहे हैं और क्या छिपाना चाहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एमपी कैडर के आईएएस और राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन भरत यादव से अखिलेश यादव का खास रिश्ता है। भरत यादव, सपा के कद्दावर नेता और पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के दामाद हैं।
राजभर के अनुसार, मध्य प्रदेश में हाईवे का रूट तय करने की जानकारी भरत यादव को होती है और अखिलेश की तिलमिलाहट यह बताती है कि भरत यादव के जरिए वहां जमीनों में भारी निवेश कराया गया है।
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राजभर ने सैफई परिवार पर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के दौरान भी निजी फायदे के लिए रूट मोड़ने और औने-पौने दाम में जमीनें खरीदकर भारी मुआवजा वसूलने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि गोमती रिवर फ्रंट की रिपोर्ट के बाद अब अखिलेश को डर है कि कहीं मध्य प्रदेश एक्सप्रेसवे की रिपोर्ट जारी होने से उनका निवेश न डूब जाए, इसलिए जांच एजेंसियों को वहां निवेश करने वाले सफेदपोशों का पता लगाना चाहिए।
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद को भारतीय जनता पार्टी की एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए मोहन यादव का बचाव किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी मोहन यादव को बदनाम करने के लिए यह साजिश रच रही है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या बीजेपी को पहले से नहीं पता था कि मोहन यादव रियल इस्टेट का काम करते थे? अखिलेश यादव का दावा है कि बीजेपी मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाने का रास्ता ढूंढ रही है, ताकि अंततः वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी पद से हटा सकें।
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