बृजभूषण को मिली क्लीन चिट के खिलाफ सेशन कोर्ट पहुंची महिला पहलवान: फैसले को दी चुनौती
नई दिल्ली: पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में मिली राहत को महिला पहलवानो ने अदालत में चुनौती दी है। निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानो ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दायर की है।
पहलवानो का गंभीर आरोप है कि नीचली अदालत का फैसला तथ्यों के बजाय ‘रूढ़िवादी और दकियानूसी सोच’ पर आधारित था। इस याचिका में सह-आरोपी विनोद तोमर को मिली राहत का भी विरोध किया गया है जिस पर कोर्ट कल सुनवाई कर सकता है।
एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई अपील में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का वह फैसला कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है क्योंकि उसमें सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन करने के साथ-साथ आदेश को पूरी तरह अनुमानों व अटकलों पर आधारित रखा गया है तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही ढंग से लागू नहीं किया गया है।
पीड़िता के व्यवहार पर पुरानी सोच का विरोध
पहलवानों की ओर से दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि अदालत ने अपने आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया और यह मान लिया कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को एक निश्चित तरीके से ही व्यवहार करना चाहिए, जबकि कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष के रसूख को देखते हुए अपने करियर के बर्बाद होने के डर से तुरंत खुलकर विरोध न कर पाना पूरी तरह स्वाभाविक था जिसे अदालत ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
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इसके अलावा, याचिका में यह भी प्रमुखता से उठाया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का केवल एकतरफा और चयनात्मक मूल्यांकन किया है, जिसके आधार पर इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी गई है।
बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को लगभग तीन साल तक चली लंबी क़ानूनी प्रक्रिया के बाद, हाल ही में 3 अगस्त 2026 को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था। निचली अदालत ने दोनों को यौन उत्पीड़न के मामले में क्लीन चिट दे दी थी लेकिन अब महिला पहलवानो ने इस राहत को ऊपरी अदालत में चुनौती दे दी है। इसके कारण करीब दो महीने बाद यह हाई-प्रोफइल मामला एक बार फिर क़ानूनी विवादों में आ गया है।
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