इज़राइल में त्रिशंकु संसद: संकट में नेतन्याहू, अरब दलों के साथ सरकार बनाने की रेस में विपक्ष
इजराइल: संसदीय चुनावो में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे रहने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाई है। इस राजनीतिक अनिश्चितता के बीच विपक्षी दल सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों से संपर्क साध रहे हैं। अरब राजनीतिक दलों ने भी नेतन्याहू विरोधी गुट का साथ देने और नई सरकार के गठन में मदद करने के संकेत दिए हैं।
इस्राइल में निर्वाचन आयोग वर्तमान में इस्राइली सेना के जवानों, कैदियों, चिकित्सा कर्मियों और विदेश में तैनात प्रतिनिधियों के डबल एनवेलप वोटों की गिनती कर रहा है, जिसके शुरुआती अनुमानों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगियों को कुल 53 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है।
नेतन्याहू के खिलाफ प्रदर्शन और गठबंधन की मांग
इसी बीच, यायर गोलान की पार्टी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर नस्लवाद और वर्चस्ववादी राजनीति का विरोध किया है और नेतन्याहू की सरकार को हटाने के लिए यहूदी-अरब गठबंधन सरकार बनाने की जोरदार अपील की है, क्योंकि बदलाव के पक्ष में 67 सीटों का समर्थन दिखाई दे रहा है जो सरकार गठन के लिए आवश्यक 61 सीटों से अधिक है।
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हालांकि, संयुक्त सूची ने वैकल्पिक सरकार बनाने की इच्छा जताई है, लेकिन विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट का मानना है कि फलस्तीन के मुद्दे और ईरान के खिलाफ कार्रवाई जैसे विषयों पर दोनों पक्षों के विचार अलग होने के कारण अरब पार्टियों के साथ गठबंधन बनाना आसान नहीं होगा और इसके लिए लंबी बातचीत की आवश्यकता होगी।
इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने नेताओं से तुरंत देश को दोबारा चुनाव में झोंकने के बजाय मिलकर सरकार बनाने की बात कही है। विपक्ष के लिए अब असली परीक्षा यह है कि क्या वे अरब दलों के साथ समझौता करके जादुई आंकड़ा हासिल कर पाएंगे। वहीं दूसरी तरफ, मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी सत्ता में बने रहने के लिए नए समीकरणों की तलाश में जुटे हुए हैं।
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