MLC चुनाव: गृह जिलों में ठंडी पड़ी वोटिंग की रफ्तार, बड़े-बड़े उम्मीदवारों की बढ़ी टेंशन
नई दिल्ली: गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में कुल 79.01 फीसदी वोटिंग हुई है, लेकिन बड़े उम्मीदवारों के खुद के जिलों में कम वोट पड़ने से उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
जानकारों का मानना है कि इस चुनावी इलाके के अलग-अलग जिलों में वोट प्रतिशत के इस बड़े अंतर से जीत-हार के पुराने समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, अपने ही घर में कम वोटिंग होने से किस उम्मीदवार को कितना नुकसान होगा, इस बारे में अभी दावे के साथ कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
दिग्गजों के घर में कम वोटिंग
चुनाव में सभी 17 जिलों में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को अच्छा समर्थन मिला है, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के साथ-साथ अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के गृह जनपदों में मतदान का ग्राफ अपेक्षाकृत कम रहा।
आंकड़ों के अनुसार, ध्रुव कुमार के गृह जिले सिद्धार्थनगर में 76.86 प्रतिशत, डॉ. संजयन के गृह जिले गोरखपुर में 76.84 प्रतिशत, अजय सिंह के गृह जिले आजमगढ़ में 73.98 प्रतिशत और अजीत सिंह के गृह जनपद मऊ में सबसे कम 73.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि बलरामपुर में सबसे अधिक 89.31 प्रतिशत मतदान हुआ।
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राजनीतिक विश्लेषक अमित उपाध्याय का मानना है कि पुरानी पेंशन योजना को छोड़कर प्रत्याशियों के अलग-अलग एजेंडे होने से मतदाता भ्रमित हुए, जिसका असर गृह जिलों में कम वोटिंग के रूप में दिखा। हालांकि, पिछले चुनाव की तुलना में इस बार कुल मतदान प्रतिशत लगभग पांच फीसदी बढ़ा है, जिसका फायदा राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को मिल सकता है।
संतकबीरनगर के मेहदावल बूथ पर तीन रिटायर्ड शिक्षकों के वोट डालने को लेकर सपा एजेंट की आपत्ति के बाद हंगामा हो गया। बाद में अफसरों के दखल और जांच के बाद ही उन्हे वोट डालने दिया गया। वही, गोरखपुर के भी कुछ बूथों पर हल्की नोकझोंक हुई, जिसे प्रशासन ने समय रहते शांत करा दिया।
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