आंदोलन दबाने के लिए मोदी सरकार ले रही तानाशाही का सहारा: शिवसेना का आरोप
नई दिल्ली: शिवसेना ने दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शनों को रोकने के लिए की गई भारी सुरक्षा पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में आरोप लगाया गया कि सरकार आम जनता और विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए तानाशाही तरीके अपना रही है।
उद्धव ठाकरे गुट का दावा है कि छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आतंकवाद व् नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल विशेष सुरक्षा बालो को बुलाकर दिल्ली में तैनात किया गया है।उनके अनुसार, एक लोकतांत्रिक आंदोलन को रोकने के लिए ऐसी अभूतपूर्व किलेबंदी और हथियारों से लैस जवानों का इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में कड़े सुरक्षा इंतजामों के तहत रास्तों को सील कर दिया गया और लगभग 100,000 हथियारबंद कर्मियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास को घेर लिया, जिससे इंटरनेट, मेट्रो, बस, ट्रेन और उड़ान सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गईं।
दिग्गजों की हिरासत और देशव्यापी विरोध
इसके बावजूद दिल्ली में छात्रों व सिविल सोसाइटी की भारी भीड़ उमड़ी और पुलिस ने दीपांकर भट्टाचार्य, मनोज झा, ममता बनर्जी तथा अरविंद केजरीवाल जैसे प्रमुख नेताओं व पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में ले लिया, जबकि मुंबई में तुषार गांधी को भी सत्याग्रह के दौरान रोक लिया गया जिसके विरोध में आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में डीएन नगर पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाला गया।
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इन तमाम घटनाओं के बीच यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स ऑफिस व ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ सहित कई वैश्विक मीडिया आउटलेट्स ने मनमानी हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताते हुए यह गंभीर टिप्पणी की है कि वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र एक बहुत बड़े संकट का दौर देख रहा है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए केंद्र सरकार की कड़ी घेरबंदी को उसकी घबराहट और कमजोरी का संकेत बताया है। संपादकीय में तीखा तंज कसते हुए कहा गया है कि जब भी कोई सत्ता आम जनता के आक्रोश से डरती है, तो वह खुद को बचाने के लिए भारी सुरक्षा बल और लोहे की अभूतपूर्व दीवारें खड़ी है।
पार्टी का दावा है कि इतिहास गवाह है कि जब जन-आक्रोश अपने चरम पर पहुंचता है तो ऐसी हथियारों से लैस और मजबूत दीवारें भी जनता की बगावत के आगे टिक नहीं पातीं और अंततः ढह जाती हैं।
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