विजयदशमी पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘रिजीम चेंज’ वाले आंदोलनों से देश को किया सावधान
नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान देश को बाहरी और आंतरिक खतरों से सावधान किया। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अल्बानिया जैसी वैश्विक घटनाओं और पश्चिम से आ रही अराजक आंधी से भारत को सबक लेने की जरूरत है।
भागवत ने सख्त चेतावनी दी कि केवल सत्ता बदलने रिजीम चेंज के इरादे से किए जाने वाले आंदोलन देश की बुनियादी समस्याओं को हल नहीं करते बल्कि ये निजी राजनीतिक फायदों के लिए समाज में बंटवारे और अशांति को बढ़ावा देते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘पंच परिवर्तन’ समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक अनुशासन को समाज के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि यह केवल एक साल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन में आचरण बदलने की शैली है।
नई पीढ़ी पर प्रभाव और ओटीटी के खतरे
नई पीढ़ी को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि बिना विवेक के जानकारी ग्रहण करने और ओटीटी प्लेटफॉर्म के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए समाज व शासन प्रशासन को विचार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नशे की समस्या पर युवाओं को बचाने के लिए अभिभावकों की भूमिका को अहम बताया।
इसे भी पढ़ें: ‘कानून आपके घर का नहीं बुजुर्ग को जेल भेजने वाली जज को हाईकोर्ट की फटकार, FIR पर रोक
विकास और पर्यावरण पर बोलते हुए उन्होंने नेपाल की त्रासदी का हवाला दिया और कहा कि हिमालयी क्षेत्र में एकांगी विकास के भारी नुकसान से सबक लेते हुए संतुलित और समग्र विकास की दृष्टि अपनानी चाहिए।
अंत में, उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार के साहसिक कार्यों और संस्कारों की सराहना करते हुए कहा कि हमें अपनी विस्मृति को दूर कर देश की एकता, स्वदेशी और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
