वोटर लिस्ट में धांधली के खिलाफ विपक्ष का अगला कदम: राहुल गांधी के घर सजी ‘सियासी चाय’
नई दिल्ली: ‘चलो दिल्ली’ मार्च के संपन्न होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर विपक्षी नेताओ और सामाजिक कार्यकर्ताओ का जुटना शुरू हो गया है।
उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों, छात्र संघों के प्रतिनिधियों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों को इस अनौपचारिक बैठक में चाय पर आमंत्रित किया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हालिया विरोध प्रदर्शनों और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद विपक्ष की आगे की साझा रणनीति तैयार करना है।
राहुल गांधी के आवास पर पहुंचे ‘INDIA’ ब्लॉक के दिग्गज
इससे पहले राहुल गांधी ने एक्स पर अपने पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए लिखा, “आज मैंने INDIA गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के साथियों को अपने घर चाय पर बुलाया है। लोकतंत्र की रक्षा के इस जनांदोलन में हम सब एक साथ हैं – और ये आंदोलन लगातार जारी रहेगा। चाय के बाद हम सभी मिलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे।
इसी क्रम में राहुल गांधी के आवास पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास, पवन खेड़ा और अन्य प्रमुख नेता पहुंच चुके हैं, जहाँ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के आवास पर चाय पर अहम बैठक शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की आपत्ति और 14 खामियां
इससे पहले, राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था, जिसके बाद विपक्ष के 11 नेताओं (जिनमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं
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ने चुनाव आयोग के एसआईआर से जुड़े फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में 14 खामियां निकाली हैं और संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका के संदर्भ में यह स्पष्ट करने को कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्तों एसएस संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी क्यों बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे वोटर लिस्ट में सुधर के दौरान चुनाव आयोग द्वारा अपने द्वारा अपने अधिकारों के कथित गलत इस्तेमाल और गड़बड़ियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आए है।
उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि मतदाता सूची को बदलने, नाम काटने या जोड़ने के फैसलों की और उन्हें लागू करने के पूरे तरीके की एक निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
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