रिजिजू के बयान पर भड़के ओवैसी, बोले- ‘बुनियादी हक छीनने का चल रहा प्रोपेगैंडा’
नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच ‘अल्पसंख्यक’ की परिभाषा और आबादी को लेकर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एक सम्मेलन में किरेन रिजिजू द्वारा मुस्लिम आबादी की तुलना पारसी समुदाय से करने पर ओवैसी बुरी तरह भड़क गए हैं और उन्होंने मंत्री को ‘अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम करने वाला मंत्री’ करार दिया है।
भारत में अल्पसंख्यकों की परिभाषा और उनके अधिकारों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा मुस्लिम आबादी की तुलना पारसी समुदाय से करने पर एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा पलटवार किया है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री देश के मुसलमानों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने के लिए एक सोची-समझी ‘प्रोपेगैंडा’ (दुष्प्रचार) राजनीति चला रहे हैं।
किरेन रिजिजू ने क्या कहा था?
दरअसल, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आबादी का एक गणित पेश किया था।
रिजिजू ने कहा, “अगर हम भारत की मुस्लिम आबादी को एक अलग देश के रूप में देखें, तो यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ पारसी समुदाय की आबादी महज 52,000 से 53,000 के बीच है, जो कि एक बड़े गांव के बराबर है। इसके बावजूद दोनों को ही देश में अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है।”
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केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार लगातार अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं को अपडेट करती रहती है। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर हज यात्रा को लेकर फैलाई जा रही खबरों का खंडन करते हुए साफ किया कि भारत सरकार हज के लिए एक रुपया भी नहीं देती, लोग अपने पैसों से हज यात्रा पर जाते हैं।
ओवैसी का पलटवार: “सिंपल मैथ का सवाल है, 79.8% बड़ा या 14%?”
किरेन रिजिजू के इस बयान पर असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर सिलसिलेवार पोस्ट कर तीखा हमला बोला। ओवैसी ने किरेन रिजिजू को ‘अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम करने वाला मंत्री’ बताते हुए संविधान के नियमों की याद दिलाई।
ओवैसी ने लिखा, “किरेन रिजिजू के लिए गणित का एक सीधा सा सवाल है—क्या बड़ा है? 79.8% या 14%? अगर हिंदू बहुसंख्यक समुदाय हैं, तो इस देश का हर गैर-हिंदू समूह कानूनी रूप से अल्पसंख्यक है। मंत्री जी सिर्फ इसलिए यह प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं ताकि मुसलमानों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा सके।”
संविधान के आर्टिकल 30 का हवाला: ओवैसी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 (Article 30) का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उन्हें संचालित करने का अधिकार है। आबादी बड़ी होने से किसी का अल्पसंख्यक दर्जा खत्म नहीं हो जाता।
भाषाई अल्पसंख्यक का दिया उदाहरण
ओवैसी ने किरेन रिजिजू के तर्क को खारिज करने के लिए राज्यों की भाषा का उदाहरण भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ आबादी के आकार को ही पैमाना मान लिया जाए, तो गैर-हिंदी भाषी राज्यों (जैसे तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल) में रहने वाले हिंदी भाषियों को भी भाषाई अल्पसंख्यक नहीं माना जाना चाहिए, भले ही उनकी संख्या अन्य समूहों से कहीं ज्यादा क्यों न हो।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन बिल और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है।
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