इंदौर में राहुल गांधी का बड़ा बयान: सरकार को सवाल पूछने वाले छात्र नहीं, सिर्फ अंधभक्त पसंद
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंदौर में ‘‘छात्रों की गूंज’’ कार्यक्रम में उमड़ी युवाओ की भरी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र भारत का भविष्य हैं और उनके बिना कोई भी देश मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने छात्रो की तारीफ करते हुए कहा कि वे जिज्ञासु, निडर, विनम्र और ईमानदार होते हैं।
और उनके मन में किसी के लिए नफरत नहीं होती। लेकिन इसके साथ ही राहुल गांधी ने चिंता जताते हुए कहा की आज देश का युवा और छात्र खुश नहीं है क्योकि वे अपने भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा तनाव और दबाव में है।
देश को चलाने वाला ‘विशेष सिस्टम
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश पर एक विशेष ‘सिस्टम’ के कब्जे का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसके टॉप पर छह लोग बैठे हैं, जिनमें नरेंद्र मोदी पूरे सिस्टम को चलाते हैं, अमित शाह देश को भड़काते हैं और छात्रों को पिटवाते हैं, अजीत डोभाल जासूसी करते हैं, मोहन भागवत विचारधारा की बातें करते हैं और अडानी-अंबानी इस पूरे सिस्टम को फाइनेंस करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिस्टम छात्रों से नफरत करता है क्योंकि छात्र तीखे सवाल पूछते हैं, जबकि यह सरकार केवल ‘अंधभक्त’ चाहती है जो सवाल न पूछकर केवल नफरत फैलाएं।
राहुल गांधी ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि देश में शिक्षकों के 10 लाख पद रिक्त हैं, एक लाख स्कूल बंद हो चुके हैं, और यूपीए सरकार के समय बजट का 4.6 प्रतिशत शिक्षा में जाता था जिसे घटाकर अब 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है, साथ ही पिछले 10 वर्षों में 1.5 करोड़ स्कॉलरशिप भी छीन ली गई हैं।
कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में 13 प्रतिशत आरक्षण पर रोक, एमपीपीएससी में अनियमितताओं और सिविल जज की वैकेंसी में आदिवासी युवाओं की अनदेखी जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए, जिस पर राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों के प्रदर्शन में शामिल होने और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
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दिल्ली हादसा और सरकारी लापरवाही
इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी इमारत के हादसे का जिक्र करते हुए सरकार द्वारा शिक्षा में कम पैसा लगाए जाने को इसका मुख्य कारण बताया, जिसमें सात छात्रों की मौत हो गई थी, और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाते हुए मदद का आश्वासन दिया।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन के आखिर में कहा कि वे देश के छात्रों में टूटी हुई उम्मीद को दोबारा जगाना चाहते है ताकि युवाओ का भरोसा शिक्षा और देश की व्यवस्था पर फिर से कायम हो सके।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी ताकत जैसे ईमानदारी, जिज्ञासा, और दयालुता- के दम पर देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में आज जो नफरत और हिंसा फैलाई जा रही है उसे केवल समझदार छात्र ही ख़त्म कर सकते है कोई अंधभक्त नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अंधभक्तो का नहीं, बल्कि छात्रों का हिंदुस्तान देखना चाहते है।
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