पैगंबर पर टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार, कहा— पहले पुलिस के पास जाएं, सिस्टम पर रखें भरोसा
सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले पुलिस से संपर्क करने और कानूनी सिस्टम पर भरोसा रखने की सलाह दी है
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 जुलाई) को पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों के मामले में दायर एक जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को दोटूक नसीहत देते हुए कहा कि वे इस मामले को लेकर पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें और देश के कानून व प्रशासनिक सिस्टम पर भरोसा रखें।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में तभी दखल देगी, जब संबंधित प्राधिकारी और पुलिस प्रशासन कानून के मुताबिक अपनी उचित कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल साबित होंगे।
दरअसल, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) अंसार अहमद चौधरी द्वारा दायर इस जनहित याचिका को वकील रजत कुमार ने आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए पेश किया था।
उन्होंने दलील दी थी कि नाज़िया इलाही खान नाम की एक इन्फ्लुएंसर द्वारा जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई इन भड़काऊ टिप्पणियों के क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और भारी अशांति फैल सकती है।
जल्द सुनवाई की इस मांग पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में सबसे पहले कानून के तहत उपलब्ध तय प्रक्रिया का ही पालन किया जाना चाहिए।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने याचिकाकर्ता के वकील से सीधा सवाल पूछा कि क्या इस मामले में अभी तक कोई एफआईआर या केस दर्ज कराया गया है? उन्होंने कहा कि जमीन पर कानून व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस मौजूद है, इसलिए हमें हमारी व्यवस्था पर भरोसा रखना होगा।
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जस्टिस अमानुल्लाह ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह देश की सबसे बड़ी अदालत है और इसका मुख्य काम संस्थाओं की निगरानी करना है।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे लिए भी यह देखने का मौका है कि क्या निचले स्तर के सरकारी अधिकारी और पुलिस अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर हर छोटे-बड़े मामले को इसी तरह ‘शॉर्ट-सर्किट’ करके सीधे शीर्ष अदालत में लाया जाएगा, तो निचले अधिकारी भी अपने हाथ खड़े कर देंगे, और आज हर संस्था के बेपटरी होने की एक बड़ी वजह यही है कि सब कुछ ऊपर से तय होने लगा है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए वकील को कूटनीतिक संयम बरतने की सलाह दी। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर भी ऐसे संवेदनशील मामलों को लेकर बेहद गंभीर हैं, लेकिन न्याय की एक तय प्रक्रिया होती है।
उन्होंने वकील रजत कुमार से कहा कि संवेदनशील मामलों में आप सबसे पहले भारत के जिम्मेदार नागरिक हैं, इसलिए आपको इसके सामाजिक परिणामों को समझना चाहिए और ऐसी बातों को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए।
अदालत ने भरोसा दिलाया कि यदि किसी भी व्यक्ति ने देश के कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कानून के दायरे में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए पहले पुलिस प्रशासन को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि जून महीने में नाज़िया इलाही खान द्वारा की गई इन कथित टिप्पणियों के बाद देश के तमाम मुस्लिम संगठनों में भारी नाराजगी है और कई राज्यों में उनके खिलाफ शिकायतें व प्राथमिकी भी दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सीधे इस मामले में हस्तक्षेप करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं।
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