नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार से इस वक्त की एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आ रही है।
वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया पूरी तरह पस्त नजर आ रहा है।
ताजा कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर यानी रिकॉर्ड तोड़ ₹96.60 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट के चलते रुपया साल 2026 में अब तक एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है।
आसान भाषा में समझें तो अचानक रुपये की सेहत बिगड़ने और इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार हैं। सबसे पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहा इजाफा है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है।
दूसरा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर की जा रही बिकवाली है, जिससे देश से डॉलर बाहर जा रहा है।
तीसरा और आखिरी कारण वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना है, जिसने रुपये समेत दुनिया भर की अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भारी दबाव बना दिया है। इन तीनों ही विपरीत परिस्थितियों ने मिलकर भारतीय रुपये को इस ऐतिहासिक निचले स्तर पर धकेल दिया है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।