सत्य निकेतन हादसा: एमसीडी के पीजी सर्वे के तरीके पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

सत्य निकेतन हादसा: एमसीडी के पीजी सर्वे के तरीके पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे के बाद नगर निगम MCD भले ही पेइंग गेस्ट PG की जांच पड़ताल कर रहा है लेकिन इसके तरीके पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि निगम के पास दिल्ली में चलने वाले पीजी की कोई पक्की और नई लिस्ट नहीं है।

एमसीडी केवल मोहल्ले के लोगों RWA और स्थानीय सूत्रों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर ही पीजी की पहचान कर पा रही है, जबकि हकीकत यह है कि मुखर्जी नगर और लक्ष्मी नगर जैसे छात्र बहुल इलाकों का लगभग हर घर पीजी में बदल चुका है।

बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड या पुख्ता सूची के निगम के लिए इन सभी अवैध पीजी तक पहुंचना और उन पर कार्रवाई करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

 पूरी इमारत को ‘पीजी’ मानना गलत

एमसीडी के इस सर्वे में दूसरी बड़ी कमी पेइंग गेस्ट PG को लेकर उसकी परिभाषा है क्योंकि वह पूरी बिल्डिंग को ही एक पीजी मानकर चल रहा है। जबकि हकीकत यह है कि ऐसी कई इमारतें हैं जहां मकान मालिक सिर्फ एक मंजिल कुछ कमरे या एक छोटा सा हिस्सा छात्रों को किराए पर देते हैं और बाकी हिस्से में खुद उनका परिवार रहता है।

जानकारों का कहना है कि इस गलत तरीके की वजह से एमसीडी कभी भी अवैध पीजी के इस बड़े नेटवर्क की गहराई तक नहीं पहुंच सकती, इसलिए वे इस पूरे सर्वे के सही होने और इसकी पहुंच पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

एमसीडी के पीजी सर्वे में बड़ी कमी उसकी परिभाषा है क्योंकि वह पूरी इमारत को पीजी मान रहा है, जबकि कई जगह सिर्फ एक फ्लोर ही किराए पर है। निगम ने तीन दिनों में सिर्फ 1,355 पीजी का सर्वे किया जिनमें 27 हजार छात्र रहते हैं, जबकि दिल्ली में साढ़े चार लाख छात्रों को पीजी की जरूरत है।

दिल्ली में हर साल स्नातक में करीब 80 हजार छात्र दाखिला लेते हैं, जिससे चार वर्षीय डिग्री के कुल छात्र 3,20,000 हो जाते हैं। इनमें से आधे यानी 1.60 लाख छात्र बाहरी राज्यों से हैं। अन्य विश्वविद्यालयों के 60 हजार बाहरी छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले 2 लाख युवाओं को मिलाकर कुल संख्या लगभग 4,50,000 है।

दिल्ली में अवैध पीजी पर नकेल
छात्र ही नहीं, कामकाजी महिलाओं व पुरुषों के लिए दिल्ली में पीजी चल रहे हैं। सेवानिवृत्त चीफ टाउन प्लानर शमशेर सिंह के अनुसार, दिल्ली में पीजी की संख्या बहुत ज्यादा है और इन्हें चलाने के लिए बिल्डिंग प्लान, फायर एनओसी व एमसीडी की मंजूरी जरूरी होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर एमसीडी खुद थोड़ी मेहनत करे और दिल्ली पुलिस व फायर डिपार्टमेंट से रिकॉर्ड डाटा ले ले, तो अवैध रूप से चल रहे पीजी की सही संख्या का आसानी से पता लगाया जा सकता है।


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Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।