दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: धरना स्थल पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते
नई दिल्ली: रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे धरने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने की दलील देते हुए व्यापारी संगठनों ने इस प्रदर्शन को हटाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
इस पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विरोध जताने के नाम पर किसी भी सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं जमाया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने रामलीला मैदान में जारी प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने से जुड़ी किराना कमेटी दिल्ली सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और चुनाव आयोग को नोटिस
साथ ही अदालत में अव्यवस्था फैला रहे वकीलों को भी उन्होंने फटकार लगाई। व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के कारण आसपास की दुकानें बंद हैं और व्यापार ठप्प हो गया है।
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इस पर अदालत ने कथित सामूहिक हिरासत, पुलिस बर्बरता, मेट्रो व इंटरनेट बंद होने जैसे मुद्दों को भी शामिल करते हुए व्यापारी संगठनों को निर्देश दिया कि वे प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को मामले में पक्षकार बनाएं, जिसके बिना फैसला नहीं सुनाया जा सकता।
वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 12 अन्य विपक्षी नेताओं की उस याचिका पर यह कदम उठाया है, जिसमें विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी और धांधली के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
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