वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर UN की चिंता, पवन खेड़ा का मोदी सरकार पर तंज

वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर UN की चिंता, पवन खेड़ा का मोदी सरकार पर तंज

भारत में हो रहे SIR प्रक्रिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। यूएन ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर सरकार से जवाब मांगा। अब इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तंज कसा है

 

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के तीन विशेष प्रतिवेदकों द्वारा भारत में चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर चिंता जताए जाने और चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर भारत सरकार से जवाब मांगने के बाद देश में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

यूएन की ओर से जारी पत्र में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों पर इसके कथित प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसके बाद विपक्ष केंद्र सरकार पर पूरी तरह हमलावर हो गया है।

इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया कि ज्ञानेश कुमार की समझदारी और काबिलियत की चर्चा अब संयुक्त राष्ट्र में हो रही है।

उन्होंने आगे लिखा कि पूरे देश के लिए यह कितने गर्व का पल है और आने वाली पीढ़ियां इसे याद रखेंगी।

टीएमसी ने भी उठाए सवाल

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत में एक असंवैधानिक एसआईआर प्रक्रिया के कारण लाखों वोटर चुनावी लिस्ट से गायब हो गए हैं और उनके और भी गायब होने का खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बिना जवाबदेही वाले एआई-आधारित अपारदर्शी एल्गोरिदम के जरिए वोटरों के अधिकारों को खत्म कर रहा है और ‘वैनिश कुमार’ की अगुवाई वाले चुनाव आयोग ने भारत के लोकतंत्र को शर्मसार किया है।

यूएन की ओर से 1 मई 2026 को भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अल्पसंख्यक समुदायों पर इसके असर को लेकर चिंता है।

रिपोर्ट में भारत सरकार को इन आरोपों का जवाब देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। यह साझा पत्र अल्पसंख्यक मामलों पर यूएन विशेष प्रतिवेदक, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक और धर्म या आस्था की स्वतंत्रता से जुड़े विशेष प्रतिवेदक की ओर से भेजा गया है।

इस यूएन रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नंदीग्राम में एसआईआर प्रक्रिया के तहत हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय की संख्या कथित तौर पर काफी अधिक रही।

इसमें दावा किया गया है कि नंदीग्राम में हटाए गए कुल मतदाताओं में करीब 95 फीसदी मुस्लिम थे, जबकि उस पूरे क्षेत्र के कुल मतदाताओं में मुस्लिम आबादी लगभग 25 फीसदी ही है।

यूएन विशेषज्ञों ने इन आरोपों को कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों से जोड़ते हुए चिंता जताई है और भारत के उन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का हवाला दिया है, जिनमें भेदभाव से सुरक्षा और बिना किसी बाधा के मतदान करने के अधिकार से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं।

मानवाधिकार दायित्वों का हवाला

यूएन विशेषज्ञों ने इन आरोपों को कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों से जोड़ते हुए चिंता जताई है। रिपोर्ट में भारत के उन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें भेदभाव से सुरक्षा और मतदान के अधिकार से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।