प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में मचा घमासान: बीजेपी बोली- भाषा की मर्यादा तार-तार
संसद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति और बयानों को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के हमले पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताया और माफी की मांग की
नई दिल्ली: संसद भवन का गलियारा इन दिनों सियासी बहसों से ज्यादा मर्यादा की सीमाओं को लेकर चर्चा में है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी के खिलाफ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा दी गई हालिया टिप्पणी पर सत्ता पक्ष पूरी तरह से हमलावर हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने इस मुद्दे पर गांधी परिवार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आदी हो चुके हैं।
प्रह्लाद जोशी जी के लिए जिस प्रकार की भाषा का उपयोग प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने किया है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और दोनों नेताओं को संसद के नियम एवं उच्च परंपराओं का सम्मान करते हुए तुरंत देश और सदन से क्षमा मांगनी चाहिए।
शाहनवाज हुसैन ने यह भी साफ किया कि किस नेता को कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी, यह निर्णय पूरी तरह प्रधानमंत्री का संवैधानिक विशेषाधिकार है।
उन्होंने प्रह्लाद जोशी का रिपोर्ट कार्ड याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने एक मंत्री के तौर पर कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी का बेहद सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
गांधी परिवार की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए शाहनवाज ने चुटकी ली कि राहुल और प्रियंका गांधी शायद यह मानकर चल रहे हैं कि देश के मंत्रिमंडल का गठन भी उनसे परामर्श लेकर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसदीय मर्यादाओं को बार-बार लांघने की इस प्रवृत्ति को देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी और न ही उन्हें माफ करेगी।
यह पूरा राजनीतिक घमासान तब शुरू हुआ जब संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर चर्चा चल रही थी।
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इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे और एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए उन पर बयान दिया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत पूरी बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों के आरोपियों का बचाव करने वाले व्यक्ति से अधिक शर्मनाक कोई नहीं हो सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति का देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारी संभालना करोड़ों छात्राओं और विद्यार्थियों के सम्मान के अनुरूप नहीं है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देशभर की करोड़ों छात्राएं उन शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करती हैं, जिनकी जिम्मेदारी अब प्रल्हाद जोशी के पास है।
उनका आरोप था कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार का रवैया निराशाजनक रहा है और देश की महिलाएं ऐसे दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करेंगी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ कांग्रेस पार्टी यानी प्रियंका और राहुल गांधी का मुख्य तर्क मंत्री पद के चयन और पुराने बयानों पर सवाल खड़े करना रहा, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी यानी सत्ता पक्ष ने इसे व्यक्ति-चरित्र हनन और नियम-विरुद्ध बताते हुए बयान को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
सदन के भीतर मचे इस हंगामे के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा और सदस्यों को तथ्यों के बिना आरोप न लगाने की हिदायत दी गई।
बीजेपी का मानना है कि विपक्ष मूल मुद्दों पर बहस करने के बजाय भाषा का स्तर गिराकर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहा है।
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