जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड पर भारी हंगामा; उमर अब्दुल्ला ने भाजपा को घेरा
श्री नगर: जम्मू कश्मीर के मुख़्यमंत्री उम्र अब्दुल्ला ने शुक्रवार 25 सितंबर 2026 को विधानसभा में राज्य का दर्जा स्टेटहुड बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया जिस पर भारी हंगामा हुआ और सदन 30 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
बाद में उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगया है कि बीजेपी विधयक ही जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने की रह में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे है।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्य बात यह है कि बीजेपी राज्य का दर्जा statehood बहाल करने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहती, यह प्रस्ताव पहले पास हुए प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं करता हम चाहते हैं कि बीजेपी इस बार सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए वोट करे।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले दो सालों में हमें कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रस्ताव पर आज भाजपा आपत्ति जता रही है, वे तो बहुत पहले ही विधानसभा से पास हो चुके हैं।
उमर अब्दुल्ला ने दी बड़ी सफाई
उमर अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि हमने अपने वर्तमान प्रस्ताव में उन पुरानी बातों का जिक्र सिर्फ इसलिए किया है ताकि इसे राज्य का दर्जा स्टेटहुड वापस पाने की दिशा में एक जरूरी और अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पुराने प्रस्तावों, जिनका जिक्र इस प्रस्ताव में किया गया है, उसका मतलब यह नहीं है कि उन प्रस्तावों को फिर छेड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि उनका यह प्रस्ताव पूरी तरह संवैधानिक है और इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज नई दिल्ली तक पहुंचाना है।
इसे भी पढ़ें: विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी: बहुमत के करीब पहुंचे ‘सुपरस्टार’, कांग्रेस से मिलाया हाथ
उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी खुद चुनाव में राज्य का दर्जा स्टेटहुड देने का वादा करने के बाद अब अपने घोषणापत्र से मुकर रही है, और उसके 29 विधायक ही राज्य का दर्जा मिलने की राह में सबसे बड़ी रुकावट बने हुए हैं।
भाजपा ने प्रस्ताव को बताया विवादित
दूसरी तरफ भाजपा विधायक और विपक्ष के नेता LoP सुनील शर्मा ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह विवादित और अस्वीकार्य बताया।
उन्होंने याद दिलाया कि इसमें जिस पुराने स्वायत्तता ऑटोनॉमी प्रस्ताव का जिक्र है उसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने बहुत पहले ही खारिज कर दिया था। भाजपा ने स्पष्ट किया कि वे इस अमान्य और विवादित प्रस्ताव को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बीजेपी विधयक सुनील शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राधूल गाँधी और उनकी राज्य इकाई से अपना रुख साफ करने को कहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस कांग्रेस इस नए प्रस्ताव 1953 से पहले के हालात और अनुच्छेद 370 का समर्थन करती है या वह जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ खड़ी है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
