मोदी सरकार के 12 साल: कब-कब हुआ मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में प्रशासनिक और राजनीतिक जरूरतों के चलते केंद्रीय मंत्रिमंडल में चार बड़े फेरबदल और कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा चुके हैं
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की परफॉर्मेंस, राजनीतिक समीकरणों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए समय-समय पर मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव किए गए।
इन 12 सालों में कई दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी हुई, नए चेहरों को मौका मिला और कुछ को बेहतर काम के लिए प्रमोशन दिया गया।
पहला कैबिनेट विस्तार 9 नवंबर 2014 को हुआ, जिसमें सरकार का बोझ कम करने के लिए 21 नए चेहरों को शामिल किया गया और मंत्रियों की संख्या 45 से बढ़कर 66 हो गई।
इस दौरान मनोहर पर्रिकर को रक्षा, सुरेश प्रभु को रेल और जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं, जबकि सदानंद गौड़ा, डॉ. हर्षवर्धन और रविशंकर प्रसाद के मंत्रालयों में फेरबदल किया गया।
इसके बाद 5 जुलाई 2016 को दूसरा फेरबदल हुआ, जिसमें क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए 19 नए राज्य मंत्री शामिल किए गए और प्रकाश जावड़ेकर को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि परफॉर्मेंस के आधार पर निहालचंद और रामशंकर कठेरिया समेत 5 मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई।
3 सितंबर 2017 को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले तीसरा बड़ा फेरबदल किया गया, जिसमें 9 नए चेहरे शामिल हुए और कलराज मिश्र व बंडारू दत्तात्रेय समेत 6 मंत्रियों को हटाया गया। इसी दौरान निर्मला सीतारमण (रक्षा), पीयूष गोयल (रेल) और धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोट कर कैबिनेट रैंक दी गई।
मोदी सरकार के इतिहास का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल दूसरे कार्यकाल के दौरान 7 जुलाई 2021 को हुआ।
इस ‘महा-विस्तार’ में कोविड काल के दबाव और प्रशासनिक सुधारों के चलते रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ समेत 12 बड़े दिग्गजों को सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्बानंद सोनोवाल और अश्विनी वैष्णव जैसे हाई-प्रोफाइल चेहरों सहित 43 मंत्रियों ने शपथ ली।
इसी दौरान अनुराग ठाकुर, किरेन रिजिजू और मनसुख मंडाविया जैसे 7 राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
इसके बाद कार्यकाल के बीच में कुछ छोटे बदलाव भी हुए, जैसे मई 2023 में किरेन रिजिजू की जगह अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्री बनाया गया।
जून 2024 में तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से अब तक कोई बड़ा कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है।
मोदी कैबिनेट की एक खास रणनीति यह भी रही कि दूसरी पार्टियों से आए मजबूत नेताओं को जल्द ही बड़ी जिम्मेदारी दी गई।
इसमें कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2021 में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया।
हरियाणा के पूर्व कांग्रेसी नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह को 2014 में ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया और शिवसेना छोड़कर आए सुरेश प्रभु को 2014 में सीधे देश का रेल मंत्री नियुक्त किया गया था।
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