महुआ मोइत्रा पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट: सर्किट हाउस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का झटका
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित सरकारी सर्किट हाउस से जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर बाहर निकाले जाने का आरोप लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर में देर रात हुई घटना की स्वतंत्र जांच से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष महुआ मोइत्रा के वकील ने इस मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया था।
वकील ने जल्द सुनवाई की मांग क्यों की
महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही सुरक्षा संबंधी आदेश पारित कर चुका है। उन्होंने कहा कि मामला महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे से जुड़ा है, इसलिए याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने तत्काल लिस्टिंग की मांग स्वीकार नहीं की।
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सर्किट हाउस को लेकर क्या है महुआ का आरोप
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन ने कलकत्ता हाई कोर्ट के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद, 14 अगस्त की आधी रात को उन्हें कृष्णनगर सर्किट हाउस से जबरन बाहर निकालने की कोशिश की।
उन्होंने इस घटना को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है।
महुआ ने खुद को मिली बुकिंग का हवाला दिया
कृष्णनगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया है कि वे नियमों के तहत सर्किट हाउस में ठहरने की पूरी हकदार थीं और बुकिंग के समय उन्हें किसी भी रोक की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध बुकिंग होने के बावजूद जिला अधिकारियों ने उन्हें जानबूझकर परेशान करने का प्रयास किया।
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