जातिगत जनगणना के तरीके पर कांग्रेस ने उठाये सवाल, राहुल और खरगे ने पीएम को लिखा पत्र

जातिगत जनगणना के तरीके पर कांग्रेस ने उठाये सवाल, राहुल और खरगे ने पीएम को लिखा पत्र

नई दिल्ली। देश में होने वाली जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाये हैं। कांग्रेस ने को जातिगत जनगणना में जातियों की गिनती करने के तरीके पर आपत्ति है। इस इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा है।

राहुल गांधी और खरगे के संयुक्त पत्र में क्या लिखा:

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए संयुक्त पत्र (अगस्त 2026) में जाति जनगणना की प्रक्रिया और प्रश्नावली पर विस्तार से आपत्ति जताई गई है।

पत्र में कहा गया है कि सरकार ने जनगणना में जाति दर्ज करने के लिए जो ‘ओपन-एंडेड’ फॉर्मेट चुना है, वह भ्रामक है। इसके तहत व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, उसे वैसे ही दर्ज कर लिया जाएगा।

पत्र में कहा गया है कि भारत में एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उप-नामों या स्थानीय बोलियों से जाना जाता है। यदि इन्हें अलग-अलग दर्ज किया गया, तो एक ही जाति हजारों अलग-अलग नामों में बंट जाएगी। इससे लाखों जातियां उभर आएंगी और जनगणना का पूरा डेटा अनुपयोगी (बेकार) हो जाएगा।

पत्र में आशंका जताई गई है कि इस त्रुटिपूर्ण तरीके से सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे, जिससे पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित समुदायों की वास्तविक स्थिति का आकलन गलत होगा। इससे शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े नीतिगत फैसलों पर बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, प्रश्नावली में ‘पिछड़े वर्ग’ (OBC) शब्द शामिल न होने के कारण देश में ओबीसी की वास्तविक आबादी का सही आकार भी पता नहीं चल पाएगा।

पत्र में समाधान के तौर पर सुझाव दिया गया है कि जिस प्रकार बिहार जाति सर्वेक्षण (2022) और तेलंगाना जाति सर्वेक्षण (2024) में ‘ड्रॉप-डाउन’ सूची (यानी पहले से तय जातियों की अधिकृत सूची) का उपयोग किया गया था, ठीक उसी तरह की व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की गिनती भी इसी तरह की सूचियों के आधार पर होती है।

पत्र के अंत में मांग की गई है कि सरकार मौजूदा प्रश्नावली को तुरंत रद्द करे। इसके बाद राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक चर्चा करके एक नई और सटीक प्रश्नावली तैयार की जाए ताकि हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आ सके।

इस विषय में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए कहा कि बिहार के जाति सर्वेक्षण के नतीजे 2 अक्टूबर 2023 को प्रकाशित किए गए थे और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के नतीजे 4 फरवरी 2025 को प्रकाशित किए गए थे।

उन्होंने खरगे और राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी को लिखे संयुक्त पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इस पत्र में राहुल जी और खरगे जी प्रधानमंत्री से यह मांग है कि वे आने वाली राष्ट्रीय स्तर की जनगणना के लिए उसी तरीके को अपनाएं जिसका इस्तेमाल बिहार और तेलंगाना में किया गया था। जिसकी शुरुआत अभी-अभी हुई है।

जयराम रमेश ने बताया कि प्रधानमंत्री के पास सुधार करने का अभी भी समय है, क्योंकि जाति जनगणना अभी केवल लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में शुरू हुई है, देशव्यापी प्रक्रिया फरवरी 2027 के लिए तय है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मौजूदा योजना को रद्द कर दें और इसके बजाय राष्ट्रीय स्तर पर उसी तरीके को लागू करें जिसका इस्तेमाल बिहार और तेलंगाना में किया गया था। राहुल जी और खरगे जी ने एक रचनात्मक सुझाव दिया है, और हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस पत्र को नजरअंदाज नहीं करेंगे।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।