वंदे मातरम विवाद: रुख बदलने को तैयार नहीं कर्नाटक सरकार, डी.के. शिवकुमार के बयान पर भाजपा का पलटवार
नई दिल्ली: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में घोषणा की है की राज्य सरकार वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाने के कांग्रेस पार्टी के पुराने फैसले का ही पालन करेगी।
उन्होंने बुधवार को साफ़ किया की वे और उनकी सरकार पार्टी के इस पारंपरिक रुख के साथ पूरी तरह खड़े है इस फैसले के मुख्य उदेश्य राष्ट्रगीत के गायन में एकरूपता बनाए रखना है। उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला उनकी जानकारी के बिना लिया गया था
उन्होंने अपनी पार्टी की विचारधारा पर अडिग रहने की बात कहते हुए भाजपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस को विविधता में विश्वास करने वाली पार्टी बताया।
गौरव वल्लभ ने शिवकुमार के बयान पर आरोप लगते हुए कहा
शिवकुमार के इस बयान पर तीखा हमला बोलते हुए भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत का अपमान करना सीधे तौर पर देश के संविधान का अपमान है और यह सब किसी खास समुदाय को खुश करने के लिए किया जा रहा है।
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गौरव वल्लभ ने चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है और संवैधानिक पद पर बैठे लोगों द्वारा राष्ट्रगीत के इस कथित अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके लिए चुनाव में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने हाल ही में अपने 1937 के पुराने प्रस्ताव को दोबारा दोहराया है, जिसके अनुसार सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ शुरुआती दो पद ही गाए जाने चाहिए।
यह फैसला तब लिया गया जब नए ‘वंदे मातरम बिल’ में राष्ट्रीय गीत के सभी पद गाना जरूरी कर दिया गया था। इसे नए कानून और राष्ट्रगीत के पूरे छह पदों को गाने के प्रोटोकॉल के बाद से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
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