यूसीसी पर जेडीयू को पच नहीं रहा अमित शाह का बयान, जेडीयू की नाराजगी से बिहार की एनडीए सरकार को खतरा
नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता UCC को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के एक बड़े बयान ने भाजपा के साथी दलों की चिंता बढ़ा दी है। मुंबई की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने एलान किया कि साल 2029 तक एनडीए के शासन वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
गृह मंत्री की इस अचानक हुई घोषणा के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू असमंजस में है और इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी चिंताओं को सामने रखने के लिए पार्टी नेताओ ने जल्द ही अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करने का फैसला किया है।
समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर जेडीयू का रुख भले ही यह है कि इसे जल्दबाजी या जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए और नीतीश कुमार ने विधि आयोग को पत्र लिखकर सभी धर्मों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यकों व हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की थी, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद जहां जेडीयू महासचिव श्याम रजक ने इसे बिहार में लागू न होने की बात कही और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी का पक्ष रखने के लिए गृह मंत्री से मुलाकात का समय मांगा, वहीं टीडीपी भी व्यापक बहस के बाद ही अंतिम रुख तय करने के पक्ष में है।
समान नागरिक संहिता और अन्य मुद्दों पर NDA सहयोगियों का रुख
भाजपा सूत्रों का मानना है कि इन दोनों सहयोगी दलों का यह अलग रुख कोई नई बात नहीं है, और हालांकि 2024 में सरकार बनाने में TDP और JDU की भूमिका अहम रही थी ।
हाल के महीनों में एनडीए की स्थिति मजबूत होने से भाजपा की इन पर निर्भरता कुछ कम हुई है, फिर भी भाजपा उत्तराखंड के सफल मॉडल का हवाला देकर और मुस्लिम महिलाओं को मिले अधिकारों को समझाकर इन दोनों दलों को विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ेगी, क्योंकि ये दल पहले भी 2019 में अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार का समर्थन कर चुके हैं।
संसद में नागरिकता संशोधन कानून को पास कराने के दौरान भाजपा के दोनों बड़े साथियों जेडीयू और टीडीपी ने सरकार के पक्ष में वोट दिया था। वही जब तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला बिल आया, तो टीडीपी ने खुलकर बीजेपी का साथ दिया, जबकि जेडीयू ने वोटिंग का बहिष्कार करके परोक्ष रूप से बिल को पास कराने में मदद की थी।
इसे भी पढ़ें: विपक्षी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित
इसी तरह वक्फ बोर्ड में सुधार के लिए लाए गए नए संशोधन विधेयक पर भी दोनों दलों ने केंद्र सरकार का पूरा समर्थन किया, हालांकि टीडीपी की सलाह पर ही सरकार विपक्ष की शंकाएं दूर करने के लिए इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने पर राजी हुई थी।
अमित शाह का बयान आने के बाद जेडीयू के नेता श्याम रजक ने कहा कि बिहार में यूसीसी नहीं लागू होने देंगे। उनका कहना है, ”हमने बिल का समर्थन किया था। लेकिन इसके साथ ही कहा था कि बिहार में इसे लागू नहीं होने देंगे। हम अपने स्टैंड पर आज भी कायम हैं।”
कहां फंसा है पेंच:
दरअसल, बिहार में जनता दल यूनाइटेड की छवि एक सेक्युलर दल की है। बिहार में जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी की मिलीजुली सरकार है। ऐसे में यदि बिहार में भी यूसीसी लागू होता है तो इसका सीधा असर जनता दल यूनाइटेड के अल्पसंख्यक मतदाताओं पर पड़ेगा और वे जनता दल यूनाइटेड से दूरी बना सकते हैं।
जानकारों की माने तो यूसीसी के मुद्दे पर अगर बिहार में बीजेपी अपने कदम पीछे नहीं खींचती है तो बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो सकते हैं। ऐसे में यूसीसी पास होने की स्थति में अल्पसंख्यको की नाराज़गी से पैदा हुए राजनीतिक भविष्य को देखते हुए जेडीयू बिहार में एकला चलो की नीति अपना सकती है। अगर सच में ऐसा हुआ तो बिहार की एनडीए सरकार खतरे में पड़ सकती है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
