समाजवादी पार्टी की एटा-कासगंज इकाई में गुटबंदी सामने आने के बाद जिला इकाइयां भंग, जिलाध्यक्ष भी हटाए गए
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लखनऊ में एटा और कासगंज सपा संगठन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक में माहौल गरमा गया जिसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों जिलों की कार्यकारिणी को भंग कर दिया है।
लखनऊ में आयोजित इस समीक्षा बैठक के दौरान अखिलेश यादव के सामने ही एटा और कासगंज के दो बड़े नेता आपस में भिड़ गए और बात गाली-गलौज तक पहुंच गई।
नाराज अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी। फिर अखिलेश यादव वहा से नाराज़ हो कर बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए।
इस हंगामे के ठीक एक घंटे बाद समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर से एक बड़ा और सख्त कदम उठाया गया, जिसके तहत एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों के साथ-साथ वहाँ के सभी फ्रंटल संगठनों को भी तुरंत प्रभाव से पूरी तरह भंग (सस्पेंड) कर दिया गया।
लखनऊ सपा मुख्यालय में एटा-कासगंज संगठन की चुनावी बैठक
लखनऊ के सपा मुख्यालय में शनिवार को एटा-कासगंज संगठन की चुनावी समीक्षा बैठक हुई, जिसमें ढाई सौ वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे। दोपहर करीब 12 बजे पहुंचे अखिलेश यादव ने नेताओं से जमीनी हकीकत और आगामी तैयारियों का फीडबैक लिया।
बैठक में सपा नेता मंजीत यादव जब हार की वजहें बता रहे थे, तभी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव भी बोलने खड़े हुए। जुगेंद्र की कुछ बातों पर मंजीत ने आपत्ति जताई, जिससे दोनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन मामला शांत होने के बजाय और गरमा गया। दावा किया गया है कि देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी।
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अखिलेश यादव का तंज
अखिलेश यादव ने तंज़ कस्ते हुए कहा कि सुबोध यादव और और जुगेंद्र सिंह यादव जैसे बड़े नेताओ से सुझाव मांगा लिया करो।
उन्होंने नेताओ और ख़राब बर्ताव को पैसे की गर्मी बताते हुए कहा कि जब किसी के पास ज़्यादा पैसे हो जाते है वह अपनी मर्ज़ी चलने लगते है इसके बाद वे बैठक बीच में छोड़कर चले गए जिसका विडिओ सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
बैठक के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक घंटे के भीतर ही एटा और कासगंज के पूरे संगठन को भंग कर दिया।
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के आदेश पर दोनों जिलों की सभी कमिटियां और पदाधिकारी तुरंत हटा दिए गए हैं।
चुनाव से पहले इस बड़े फैसले को पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है। कमान छिनने से स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनेंगे, जिससे पार्टी के सामने नई टीम खड़ी करने की बड़ी चुनौती आ गई है।
एटा के पूर्व जिला अध्यक्ष परवेज़ ज़ुबैरी ने फोन पर बात चीत में कहा कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के फैसले का पूरा सम्मान करते है उन्होंने एटा से जुड़ी। खबर को सही बताते हुए मामले पर आगे कुछ भी बोलने से इंकार क्र दिया।
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