‘कोर्ट को डराया नहीं जा सकता’: राहुल गांधी के धरने के ज़िक्र पर सीजेआई सख्त
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और विपक्ष की याचिका पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों समेत पूरे निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है। अदालत का यह नोटिस वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ आया है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर वैध वोटर्स को सूची से बाहर कर दिया गया। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी स्थिति साफ करने को कहा है।
विपक्ष की याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के खिलाफ राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने एक याचिकाकर्ता के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि अदालत बाहर के बयानों और सुप्रीम कोर्ट तक हुए राजनीतिक मार्च जैसी घटनाओं से अवगत है और कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता।
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वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया द्वारा विरोध प्रदर्शनों और वकीलों के ज्ञापन पर आपत्ति जताए जाने पर सीजेआई ने कहा कि अदालत ऐसी कमजोर कोशिशों पर ध्यान नहीं देती। 12 अक्टूबर को दायर और 13 अक्टूबर को पंजीकृत हुई इन याचिकाओं में समान राहत वाली सभी अर्जियों को अदालत ने एक साथ टैग करने का निर्देश दिया है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के फैसलों की अदालती जांच की जाए, ताकि यह परखा जा सके कि चुनाव आयोग ने संविधान के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के तहत काम किया है या नहीं।
इसमें मुख्य रूप से यह गुहार लगाई गई है कि किसी भी नागरिक का नाम हटाने से पहले उसे सूचना दी जाए और उसकी बात सुनी जाए। साथ ही, यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि जिन भी वोटर्स के नाम काटे गए हैं, उनकी बूथ-वार एक सूची जारी की जाए, जिसमें नाम हटाने की ठोस वजह और मतदाता की पूरी जानकारी साफ तौर पर लिखी हो।
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