जस्टिस कौल की दोटूक: ‘दोष साबित होने से पहले सलाखों के पीछे कटना ही सजा’

जस्टिस कौल की दोटूक: ‘दोष साबित होने से पहले सलाखों के पीछे कटना ही सजा’

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने कहा है कि भारत की न्याय व्यवस्था में किसी व्यक्ति को अदालत से दोषी करार दिए जाने या बरी होने से पहले ही जेल में जितना समय बिताना पड़ता है, वह अपने आप में एक सजा जैसा बन जाता है।

उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे मामलों पर बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जमानत मिलना एक सामान्य बात होनी चाहिए, क्योंकि सजा तो सिर्फ जुर्म साबित होने के बाद ही मिलनी चाहिए।

अपनी आगामी संस्मरण पुस्तक ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ के 31 अक्टूबर को रिलीज होने से पहले चर्चा करते हुए उन्होंने जस्टिस सुंदरेश के साथ मिलकर जमानत के मुद्दों और हिरासत के सिद्धांतों पर किए गए अपने उदार दृष्टिकोण व प्रयासों का जिक्र किया।

साथ ही, उन्होंने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में यूएपीए के तहत आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे मामलों की ओर भी इशारा किया, जिसमें हिंसा के दौरान 53 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

ये दंगे साल 2020 में नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इस पूरे मामले में बड़ी साजिश रचने के आरोप में उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल भेजा गया था।

इसी साल 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से साफ मना कर दिया था। कोर्ट का मानना था कि उनके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जिसके कारण उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं