सांसदों के दलबदल पर अन्ना का प्रहार: AAP नेतृत्व ही जिम्मेदार
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों के पाला बदलने (दलबदल) और भाजपा में शामिल होने की खबरों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अन्ना हजारे ने इस पूरी स्थिति के लिए AAP के नेतृत्व को ही जिम्मेदार ठहराया है।
अन्ना हजारे ने कहा कि यदि आम आदमी पार्टी “सही रास्ते” पर चलती, तो राघव चड्ढा और अन्य 6 राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर नहीं जाते। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आप (AAP) के नेतृत्व की गलती है। उनके अनुसार, सांसदों को जरूर किसी न किसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा होगा, जिस कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
अन्ना ने दोहराया कि जब राजनीति में मूल्यों और सिद्धांतों की कमी हो जाती है, तो इस तरह की स्थितियाँ पैदा होती हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि वह राजनीति से दूर रहने के पक्षधर थे क्योंकि उन्हें डर था कि सत्ता में आने के बाद लोग बदल जाते हैं।
राघव चड्ढा के नेतृत्व में कुल 7 सांसदों (जिनमें स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक और हरभजन सिंह भी शामिल हैं) ने AAP छोड़ दी। इन सांसदों ने संविधान के दलबदल विरोधी कानून के 2/3 बहुमत वाले नियम का लाभ उठाते हुए अपना विलय भाजपा के साथ करने का फैसला किया, ताकि उनकी सदस्यता बनी रहे।
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संजय सिंह के अनुसार, इन सांसदों को जनता ने अरविंद केजरीवाल के नाम पर और पार्टी की विचारधारा के लिए वोट दिया था। पार्टी छोड़कर जाना उन लाखों कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात है जिन्होंने इनके लिए संघर्ष किया।
केजरीवाल ने संकेत दिया कि जब पार्टी संकट के दौर से गुजर रही थी (नेताओं की जेल और अदालती मामले), तब इन सांसदों का साथ छोड़ना कायरता और अवसरवाद का सबसे बड़ा उदाहरण है। और अरविंद केजरीवाल ने भावुक होते हुए यह भी कहा कि “लोग आते-जाते रहेंगे, लेकिन सच्चाई की लड़ाई जारी रहेगी।” उन्होंने इसे AAP को खत्म करने की एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया है।
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