मध्य प्रदेश: कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजा, हॉर्स ट्रेडिंग और क्रॉस वोटिंग का डर
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्य सभा की 3 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है ऐसे में बीजेपी की तरफ से खरीद फरोख्त से क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं मद्देनज़र कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु भेज रही है।
कांग्रेस ने भोपाल में निजी विमान को उतरने की अनुमति के लिए आवेदन की किया था और उसे विमान लैंड करने की अनुमति मिल गई है।
हालांकि इस विमान की सीटिंग केपेसिटी इतनी नहीं है कि एक बार में सभी विधायकों को बेंगलुरु भेजा जा सके। इसलिए पार्टी ने फैसला किया है कि इसी विमान से दो बार में पार्टी विधायकों को बेंगलुरु भेजा जायेगा।
पार्टी सूत्रों की माने तो सभी विधायकों को बेंगलुरु के एक रेसॉर्ट में रुकैया जायेगा और ठीक चुनाव के दिन भोपाल लाया जायेगा। सूत्रों की माने तो दो बार में कांग्रेस के 61 विधायक कर्नाटक के लिए उड़ान भरेंगे।
इससे पहले करीब 4 घंटे तक कांग्रेस विधायक अपने परिवारों के साथ एयरपोर्ट पर इंतज़ार करते रहे लेकिन विमान को भोपाल एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति न होने के कारण विधायकों को इंतज़ार करना पड़ा।
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क्या है गणित:
मध्य प्रदेश विधानसभा की दलीय स्थिति के अनुसार, 230 सदस्यीय सदन में (एक सीट खाली होने के बाद प्रभावी संख्या 229) राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।
वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। दो सीटें जीतने के बाद भी बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जो जीत के आंकड़े से 10 कम हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस के पास कुल 61 विधायक हैं, जो अपनी एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए जरूरी आंकड़ों (58) से 3 वोट अधिक हैं। इसके बावजूद बीजेपी द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उतारने से मुकाबला बेहद रोचक और तनावपूर्ण हो गया है। बीजेपी को तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए विपक्षी खेमे में तोड़फोड़ या क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी।
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