राम मंदिर चोरी: श्रद्धालुओं ने बदला दान का तरीका, कीमती चढ़ावे से बना रहे दूरी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद श्रद्धालु सतर्क हो गए हैं, जिसके कारण पिछले दस दिनों से दानपात्र में सोने-चांदी के आभूषणों का चढ़ावा आना पूरी तरह बंद हो गया है
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की आस्था पर तो कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन उनके दान देने के तरीके में बड़ा बदलाव जरूर दिखाई देने लगा है। पड़ताल में सामने आया है कि अब दानपात्र में पहले की तरह सोने-चांदी के आभूषण और बेशकीमती सिक्के लगभग दिखाई नहीं देते।
मंदिर के भीतर चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार, कुछ महीने पहले तक श्रद्धालु दर्शन के दौरान भावुक होकर अपनी अंगूठी, चैन, झुमके, कंगन या सोने-चांदी के सिक्के दानपात्र में अर्पित कर देते थे, जो अब बेहद कम हो गए हैं।
चोरी की घटना उजागर होने के बाद श्रद्धालु पहले की तरह दान तो कर रहे हैं, लेकिन अब अधिक सतर्क हैं। बड़े नोटों की तुलना में छोटे नोट ज्यादा मिल रहे हैं और कीमती आभूषणों का दान लगभग न के बराबर रह गया है।
पिछले 10 दिनों में दानपात्र में कोई भी बहुमूल्य आभूषण नहीं मिला है। इस बदलाव को देखते हुए अब कीमती आभूषण दान करने वालों का नाम, पता और आभूषण का आकार-प्रकार दर्ज करने की एक नई व्यवस्था बनाई गई है, जिसके तहत एक कर्मी तत्काल यह प्रक्रिया पूरी करेगा।
दूसरी ओर, राम मंदिर में चढ़ावा गणना व्यवस्था अब सीमित कर्मचारियों के सहारे चल रही है। सूत्रों के अनुसार, 23 कर्मियों के एक साथ काम छोड़ने के बाद अब तक उनकी जगह नए लोगों की नियुक्ति नहीं हुई है। कर्मचारियों की कमी के कारण पहले केवल निगरानी करने वाले बैंक अधिकारियों और प्रबंधकों को भी कई बार काउंटिंग में हाथ बंटाना पड़ रहा है।
फिलहाल केवल 13 कर्मचारी ही रोज सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक चढ़ावे की गणना का कार्य संभाल रहे हैं। पहले यह काम छह-छह घंटे की दो शिफ्टों में होता था, लेकिन अब एक ही लंबी शिफ्ट में काम कराया जा रहा है, जिससे काम का दबाव और समय दोनों बढ़ गए हैं, जबकि पारिश्रमिक में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
थर्ड पार्टी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मियों को करीब 15 हजार रुपये मासिक से अधिक भुगतान नहीं मिलता, और रविवार की छुट्टी के दिन के पैसे भी काटे जा रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कार्यस्थल पर निगरानी और दबाव दोनों बढ़ गए हैं और यदि कार्य परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो आगे भी कुछ लोग नौकरी छोड़ सकते हैं।
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इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका और जिम्मेदारियों की भी विस्तार से जांच की है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की टीम अयोध्या धाम स्थित वैदेही भवन भी पहुंची थी, जहां स्वामी गोविंद देव गिरि अयोध्या प्रवास के दौरान ठहरते हैं। जांच टीम ने वहां के महंत और सेवादारों से पूछताछ कर उनके प्रवास की प्रकृति और वहां उनकी किसी प्रकार की स्थायी व्यवस्था या संपत्ति होने के संबंध में जानकारी जुटाई।
एसआईटी यह भी परख रही थी कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां क्या थीं तथा चढ़ावा प्रबंधन की व्यवस्था में उनकी भूमिका किस सीमा तक थी। हालांकि, एसआईटी की इस पड़ताल में क्या निष्कर्ष निकले और अंतिम रिपोर्ट में क्या टिप्पणी की गई है, इसका आधिकारिक खुलासा अभी नहीं हुआ है और सभी को अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
इसी मामले के आरोपी लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन भवन को लेकर अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) की कार्रवाई भी जारी है।
बुधवार को आरोपी की पत्नी सुप्रिया मिश्रा अपने परिजनों के साथ प्राधिकरण कार्यालय पहुंचीं और निर्माणाधीन भवन से संबंधित अभिलेख पूरे करने के लिए एक माह का समय देने का अनुरोध किया, लेकिन प्राधिकरण ने उन्हें केवल सात दिन की मोहलत दी है।
एडीए सचिव एवं विहित प्राधिकारी राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बनबीरपुर (सहादतगंज) में सुप्रिया मिश्रा के नाम करीब 1024 वर्गफुट क्षेत्रफल में जी+1 भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं पाया गया है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सात दिन के भीतर सभी आवश्यक अभिलेख, स्वीकृत अथवा शमन मानचित्र और अन्य पत्रावलियां प्रस्तुत करनी होंगी, ऐसा नहीं होने पर निर्माणाधीन भवन के विरुद्ध सीलिंग समेत अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय से बाहर निकलते समय सुप्रिया मिश्रा ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
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